हिमाचल में बुनियादी शिक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम, पूरे प्रदेश में लागू होगा अल्फा प्रोग्राम

शिमला:स्कूली बच्चों की बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और गणितीय समझ को मजबूत बनाने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. शनिवार को शिमला के होटल हॉलीडे होम में आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश सरकार और , लखनऊ के बीच ALfA को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की उपस्थिति में शिक्षा सचिव राकेश कंवर और DEVI Sansthan की CEO डॉ. सुनीता गांधी ने MoU पर हस्ताक्षर किए. कार्यक्रम में समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, अतिरिक्त निदेशक बी.आर. शर्मा, जीवन सिंह नेगी और योगेश चौहान सहित समग्र शिक्षा और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा, “ALfA शिक्षण पद्धति की शुरुआत पहले सोलन और शिमला के कुछ शिक्षा खंडों में पायलट आधार पर की गई थी. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बच्चों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला. इन्हीं अनुभवों को देखते हुए अब इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे हिमाचल प्रदेश में किया जा रहा है”.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है और इसी दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. परख सर्वे, पीजीआई, असर रिपोर्ट ने हिमाचल में शिक्षा सुधारों पर मुहर लगाई है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी की है. DEVI Sansthan के साथ यह सहयोग भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम प्रदेश के विद्यार्थियों को मिलेंगे.

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा, “आज हुआ यह समझौता पहले से चल रहे सफल प्रयासों का विस्तार है. शिक्षकों ALfA को केवल एक परियोजना न मानें, बल्कि इसे नियमित शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करें. ALfA एक सुव्यवस्थित शिक्षण पैकेज है, जिसका उद्देश्य बच्चों में बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणित की समझ को तेजी से विकसित करना है”.

उन्होंने कहा कि जब बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप FLN कौशल हासिल कर लेता है, तभी वह आगे की कक्षाओं की दक्षताओं (Class-level Competencies) को भी सफलतापूर्वक प्राप्त कर पाता है. इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार ने इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर विद्यालयों तक विस्तार देने का निर्णय लिया है, जिससे बच्चों के लर्निंग गैप को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके.

शिक्षा सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के मार्गदर्शन में हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है. अब ALfA Programme के राज्यव्यापी विस्तार से बुनियादी शिक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सकारात्मक बदलाव आएगा.

समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा, “शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने लखनऊ का दौरा कर DEVI Sansthan की ALfA शिक्षण पद्धति को करीब से देखा था. इसके बाद ही इस पहल को पूरे हिमाचल प्रदेश में शुरू करने का निर्णय लिया गया. DEVI Sansthan के साथ यह साझेदारी निश्चित रूप से स्कूली बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करेगी. नई शिक्षा नीति (NEP-2020) भी बच्चों के लिए आनंदमय, गतिविधि-आधारित और खेल-आधारित शिक्षण पर जोर देती है. ALfA पद्धति इसी सोच को व्यवहार में उतारती है”.

राजेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल के जिन स्कूलों में ALfA पद्धति को लागू किया गया है, वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. इससे कक्षा में पढ़ाई अधिक रोचक और सहभागितापूर्ण बनी है और बच्चों के सीखने के परिणामों में भी तेजी से सुधार देखने को मिला है. इसी अनुभव को देखते हुए इस पहल को पूरे हिमाचल में विस्तार दिया जा रहा है.

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा, ALfA शिक्षण पद्धति प्रदेश के स्कूलों में प्रभावी और उपयोगी साबित हुई है. अब तक जिन स्कूलों में इसे लागू किया गया है, वहां इसके उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के बच्चे इस पद्धति के माध्यम से और बेहतर सीखेंगे.

DEVI Sansthan की संस्थापक एवं CEO डॉ. सुनीता गांधी ने ALfA Programme के अनुभव साझा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में इस पद्धति को लागू करने के पीछे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का विशेष योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और सहयोग से इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर लागू करना संभव हो पाया. उन्होंने कहा कि इससे निश्चय ही बच्चों के एफएलएन में उल्लेखनीय सुधार आएगा.