मोदी सरकार ने बंद की RDG ग्रांट बंद तो सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला, घाटा पूरा करने का खोजा उपाय

शिमला. केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश अन्य पहाड़ी राज्यों की रैवन्यू डिफेसिट ग्रांट बंद कर दी. ऐसे में हिमाचल प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अब सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी शिमला में बड़ा ऐलान किया और इस घाटे को पूरा करने का उपाय खोजा है.

दरअसल, आरडीजी बंद होने पर सीएम ने हिमाचल में निर्मित सभी जल विद्युत परियोजनाओं से भूमि पर टैक्स लगाने का फैसला किया है. राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर आगामी फैसले के लिए 8 फरवरी को सीएम ने कैबिनेट बैठक बुलाई है और इस बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी जाएगी.

गौरतलब है कि रैवन्यू डिफेसिट ग्रांट बंद होने से हिमाचल सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. इधर, सीएम ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई और जल्द ही तारीख तय होगी. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खूने कहा कि भाजपा विधायक दल से भी बैठक में आने की अपील की जाएगी. इस मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है और सभी दलों को एक साथ आना होगा. आरडीजी बंद होने पर उपजी स्थिति पर सभी विधायकों को प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रेजेंटेशन दी जाएगी.

सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश को करीब 48 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिले हैं, यह एक संवैधानिक अनुदान है, जो 1952 से प्रदेश को मिलता आ रहा है. उन्होंने कहा कि आरडीजी को अचानक बंद किया जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए सरकार हिमाचल की भूमि पर स्थापित विद्युत परियोजनाओं से कर वसूलेगी, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी. जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर का सबसे अधिक लाभ बड़े राज्यों को हुआ है, जबकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर को चुनौती देते हुए कहा कि वे स्पष्ट करें कि आरडीजी बंद करने के पक्ष में हैं या इसके विरोध में?

राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान जीवनरेखा के समान
भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को मैदानी राज्यों की श्रेणी में रखना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है, 28 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर है और यहां पांच प्रमुख नदियां हैं. हिमाचल पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास करता है और ऐसे पहाड़ी राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान जीवनरेखा के समान है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी बंद होने से इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और इसके खिलाफ प्रदेश की जनता को भी संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा.