CM सुक्खू ने 12 फरवरी को फिर बुलाई कैबिनेट बैठक, किन निर्णयों पर लगेगी मुहर, क्या हिमाचल में होने वाला है कुछ बड़ा?

शिमला। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से प्रदेश की वित्तीय सेहत पर पड़े असर को लेकर सरकार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 12 फरवरी को सुबह 11 बजे मंत्रिमंडल की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में आरडीजी बंद होने से उपजे हालात, आगामी बजट पर पड़ने वाले प्रभाव और नए वित्तीय संसाधन जुटाने की रणनीति पर मंथन होगा। प्रदेश सरकार इस मुद्दे को लेकर केंद्र के समक्ष मजबूत पक्ष रखने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के लिए विपक्षी भाजपा का सहयोग भी मांगा है। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के प्रधानमंत्री से मिलने की संभावना जताई जा रही है।

आय-व्यय संतुलन की बड़ी चुनौती
इससे पहले गत रविवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में भी वित्त विभाग ने विस्तृत प्रस्तुति देकर आगाह किया था कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। सरकार के सामने आय-व्यय संतुलन की बड़ी चुनौती है। प्रदेश की अपनी आय करीब 18 हजार करोड़ रुपये है, जबकि केंद्रीय करों से लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। वहीं, ऋण लेने की सीमा 10 हजार करोड़ रुपये तक सीमित है, जिसमें से 3 हजार करोड़ रुपये पुराने ऋण की अदायगी में जाएंगे। ऐसे में वित्तीय अंतर को पाटने के लिए सरकार को कड़े निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

कैबिनेट बैठक और सत्र अहम
प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से 12 फरवरी की कैबिनेट बैठक और 16 फरवरी से शुरू होने वाला सत्र काफी अहम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार केंद्र से राहत दिलाने और वित्तीय संतुलन साधने में कितनी सफल होती है।

बजट पर 12.7 प्रतिशत तक असर
वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, आरडीजी बंद होने का सीधा असर आगामी बजट पर पड़ेगा। मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रदेश का बजट करीब 58,514 करोड़ रुपये है। अनुमान है कि आरडीजी बंद होने से बजट में लगभग 12.7 प्रतिशत की कमी के साथ 45 हजार करोड़ या इसके आसपास आ सकता है। इसका प्रभाव विकास योजनाओं के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) व एरियर भुगतान पर भी पड़ सकता है।

16 फरवरी से विधानसभा सत्र
16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के पहले दिन राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का अभिभाषण होगा। कैबिनेट बैठक में अभिभाषण के प्रारूप को मंजूरी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि राज्यपाल के अभिभाषण में आरडीजी बंद होने से उत्पन्न वित्तीय हालात का उल्लेख प्रमुखता से होगा। अभिभाषण के बाद सदन में शोक प्रस्ताव और विधायी कार्य प्रारंभ होंगे।

नए संसाधनों की तलाश
वित्तीय संकट के बीच सरकार नए संसाधन जुटाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। कर संग्रह बढ़ाने, व्यय नियंत्रण और संभावित वित्तीय पुनर्संरचना जैसे विकल्पों पर कैबिनेट में चर्चा संभव है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार को कुछ अप्रिय लेकिन आवश्यक निर्णय लेने पड़ सकते हैं।