नशे के सौदागर अब नहीं बनेंगे ‘जनसेवक’! हिमाचल सरकार ने तस्करों के चुनाव लड़ने पर लगाई पाबंदी

Drug Traffickers ban on contesting elections: हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में जहर घोलने वाले चिट्टा माफिया के खिलाफ प्रदेश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कड़ा प्रहार करने का मन बना लिया है. केवल जेल और संपत्ति जब्ती ही नहीं, अब नशा तस्करों का राजनीतिक रसूख भी हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार आगामी बजट सत्र में एक ऐसा क्रांतिकारी संशोधन विधेयक लाने जा रही है, जिसके बाद नशा तस्करी के आरोपी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट के 31 मई तक चुनाव कराने के आदेश के बीच सरकार का यह फैसला राजनीति को साफ-सुथरा बनाने और युवाओं को बचाने की दिशा में गेम चेंजर माना जा रहा है. आखिर क्या है इस नए कानून के वो प्रावधान जो तस्करों की नींद उड़ाने वाले हैं. आज हम इसके बारे में डिटेल से जानेंगे.

31 मई से पहले लागू करने की तैयारी!
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 मई से पहले स्थानीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं. इसी वजह से सरकार चुनाव से पहले ये नया प्रावधान लागू करना चाहती है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन विधेयक बजट सत्र में पेश किया जाएगा. सरकार इसे नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देख रही है.

पिछले कुछ सालों में हिमाचल प्रदेश में चिट्टा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इससे युवाओं में नशे की समस्या को लेकर चिंता बढ़ी है. सरकार पहले से ही नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है. इस अभियान में गिरफ्तारियां की जा रही हैं. साथ ही तस्करों की अवैध संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी तेज की गई है. अब चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव इस मुहिम को और मजबूत करेगा.

नशा तस्करी से जुड़े लोगों को नहीं होगी चुनाव लड़ने की अनुमति
प्रस्तावित संशोधन में यह व्यवस्था की जाएगी कि नशा तस्करी से जुड़े लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी. सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि गंभीर मामलों में आरोप तय होने की स्थिति को भी इसमें शामिल किया जाए. यानी केवल दोष सिद्ध होने पर ही नहीं, बल्कि गंभीर आरोप लगने पर भी चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है. इसके अलावा बड़े स्तर पर नशे के कारोबार में शामिल लोगों को भी इस दायरे में लाने की योजना है.

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि यह कदम प्रदेश से नशे को खत्म करने की दिशा में अहम साबित होगा. उन्होंने बताया कि सरकार पहले से ही नशे के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है. अब यह नया कानून राजनीति को साफ-सुथरा बनाने में भी मदद करेगा. सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में सकारात्मक संदेश देने में मदद मिलेगी.