तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश पर रोक से हिमाचल हाईकोर्ट का इनकार

शिमला। एमबीएम न्यूज़ ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें एकलपीठ के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके तहत नियुक्ति के बाद तीसरे बच्चे के जन्म पर भी महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया गया था। हालांकि अदालत ने सरकार की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में प्रार्थी ने नौकरी में आने से पहले दो बच्चों को जन्म दिया था, जबकि तीसरे बच्चे का जन्म नौकरी मिलने के बाद हुआ है। ऐसे में एकलपीठ के 30 जुलाई 2025 के फैसले पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण अदालत को नजर नहीं आता।

यह मामला सिरमौर से सम्बंधित एक स्टाफ नर्स से जुड़ा है जो राज्य के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 5 मार्च 2025 को बच्चे को जन्म दिया था और इसके अगले दिन यानी 6 मार्च से मातृत्व अवकाश के लिए सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से आवेदन किया था। हालांकि सक्षम अधिकारी ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह दंपति का तीसरा बच्चा है और सरकारी नियमों के तहत मातृत्व अवकाश की सुविधा केवल दो बच्चों तक ही सीमित है।

इस फैसले को चुनौती देते हुए स्टाफ नर्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर महिला कर्मचारी के पहले दो बच्चे नौकरी में आने से पहले पैदा हुए हैं और तीसरा बच्चा नियुक्ति के बाद जन्मा है तो उसे मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने सरकार के फैसले को रद्द करते हुए आदेश दिए थे कि प्रार्थी को तुरंत प्रभाव से मातृत्व अवकाश दिया जाए।

राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की और एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन खंडपीठ ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।