हिमाचल में दादा दादी के नाम अवैध कब्जा तो पोता नहीं लड़ सकता चुनाव, जाने नियम

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक की सीटों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होने के साथ ही तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है, कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति, ओबीसी या अनारक्षित वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी, अब इस पर संशय नहीं रहा। भले ही चुनाव तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी बाकी हो, लेकिन मैदान में उतरने के इच्छुक दावेदार सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगे हैं और माहौल धीरे-धीरे चुनावी रंग में रंगता दिख रहा है.

इसी बीच एक अहम सवाल भी जोर पकड़ने लगा है कि क्या अवैध कब्जों से जुड़े मामलों का चुनावी दावेदारी पर असर पड़ेगा? जिन परिवारों पर सरकारी जमीन या अन्य संपत्तियों पर अवैध कब्जे के आरोप हैं, उनके सदस्यों के लिए चुनाव लड़ने के नियम क्या कहते हैं? संभावित उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी बन गई है, ताकि नामांकन से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक किसी भी तरह की कानूनी अड़चन का सामना न करना पड़े.

दादा दादी ने नाम अतिक्रमण तो पोता चुनाव से आउट
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 122 के तहत उम्मीदवारों की योग्यता ही नहीं, उनके परिवार से जुड़ी स्थिति भी सीधे तौर पर चुनाव लड़ने के अधिकार को प्रभावित करती है. इस नियम के मुताबिक यदि किसी उम्मीदवार के परिवार के सदस्य जैसे दादा-दादी, माता-पिता के नाम पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा (अतिक्रमण) दर्ज है, तो उसका असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है. ऐसे मामलों में पोता, बेटा या अविवाहित पुत्री तक को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है. इसी तरह से अगर पति और पत्नी किसी के नाम पर अवैध कब्जा किया है तो वे भी चुनाव लड़ने के अयोग्य होंगे. इसके अतिरिक्त नियम में अविवाहित पुत्री के नाम अवैध कब्जा है तो चुनाव लड़ने की प्रक्रिया बाहर हो जाएगी। यानी यह सिर्फ व्यक्तिगत आचरण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरे परिवार की कानूनी स्थिति उम्मीदवार की पात्रता तय करती है.

बहु पर लागू नहीं होगा नियम
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 122 के तहत लागू अयोग्यता (डिसक्वालिफिकेशन) के प्रावधानों को लेकर यह बात उभरकर आई है कि परिवार के भीतर सभी सदस्यों पर यह नियम समान रूप से लागू नहीं होता। दरअसल, यदि किसी परिवार में अवैध कब्जा पिता के नाम पर है और वह संबंधित शर्तों के तहत अयोग्यता की श्रेणी में आता है, तो ऐसी स्थिति में उसका पुत्र और अविवाहित पुत्री चुनाव लड़ने के पात्र नहीं माने जाते। लेकिन अधिनियम की धारा 122 में बहू (पुत्रवधू) को इस अयोग्यता के दायरे में शामिल करने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है. यही कारण है कि कानूनी व्याख्या के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में बहू पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। परिणामस्वरूप, वह पंचायतीराज संस्थाओं के तहत विभिन्न पदों जैसे पंच, प्रधान या अन्य पद के लिए चुनाव लड़ने की पात्र मानी जाएगी.