हिमाचल प्रदेश में हाल ही में मॉनसून की रफ्तार थोड़ी धीमी होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन मौसम विभाग ने एकबार फिर नई चेतावनी जारी करते हुए लोगों को डरा दिया है। दरअसल विभाग ने बारिश के एकबार फिर से जोर पकड़ने की बात कही है। इस दौरान बुधवार को राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में बादल छाए रहे, हालांकि अधिकतर जगह बारिश नहीं हुई। राजधानी शिमला में भी बादलों का डेरा रहा और कुछ स्थानों पर धूप भी निकली।
बीते 24 घंटों में कुछ क्षेत्रों में जमकर बारिश हुई। बिलासपुर जिले के ब्राह्राणी में सर्वाधिक 82 मिलीमीटर, मंडी के जोगेंद्रनगर में 80, गग्गल में 75, धर्मशाला में 70, धौलाकुआं में 65, नैना देवी में 64, पालमपुर में 60, बजौरा में 60, मंडी में 42 और पंडोह में 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 11 सितंबर को राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन इसके बाद मॉनसून फिर सक्रिय होगा और कई जिलों में भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। विभाग ने 12 से 14 सितंबर तक राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में गरज के साथ भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
बारिश का जिलावार पूर्वानुमान
12 सितंबर को उना, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और गरज के साथ बारिश का येलो अलर्ट है।
13 सितंबर को उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में भारी बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट रहेगा।
14 सितंबर को उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी जिलों में येलो अलर्ट जारी रहेगा।
15 और 16 सितंबर को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, लेकिन किसी प्रकार का अलर्ट नहीं है।
प्रदेश में अब भी 582 सड़कें हैं बंद
बारिश में कमी के कारण भूस्खलन से अवरुद्ध सड़कों, ठप बिजली ट्रांसफार्मरों और पेयजल योजनाओं को बहाल करने का काम तेजी से किया जा रहा है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में सड़कें और ट्रांसफार्मर बंद हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बुधवार शाम तक पूरे प्रदेश में 4 नेशनल हाईवे और 582 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं। कुल्लू जिले में NH-3, NH-305 समेत कुल 214 सड़कें बंद हैं। मंडी में 150, शिमला में 58, कांगड़ा में 42, चंबा में 30 और ऊना जिले में NH-503ए व 19 सड़कें अवरुद्ध हैं। किन्नौर में NH-5 भी बंद है।
राज्य में सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित है। अब तक 571 बिजली ट्रांसफार्मर और 378 पेयजल योजनाएं ठप हैं। कुल्लू जिले में 439 ट्रांसफार्मर, लाहौल-स्पीति में 51 और शिमला में 46 ट्रांसफार्मर बंद हैं। मंडी जिले में अधिकांश ट्रांसफार्मरों को बहाल कर दिया गया है और अब केवल 8 ट्रांसफार्मर बंद हैं। पेयजल योजनाओं में कांगड़ा में 176, शिमला में 108 और मंडी में 52 योजनाएं प्रभावित हैं।
अबतक 380 लोगों की मौत
मॉनसून सीजन के दौरान प्रदेश में आपदाओं का सिलसिला भी लगातार जारी है। अब तक राज्य में 137 भूस्खलन, 97 बाढ़ और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। जिसके चलते इस मॉनसून के दौरान प्रदेश में भारी तबाही मची है। अब तक 380 लोगों की मौत हो चुकी है और 40 लोग लापता हैं, जबकि 439 लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा मौतें मंडी जिले में 61, कांगड़ा में 52, कुल्लू में 44, चंबा में 43, शिमला में 40, किन्नौर में 28, सोलन में 26, ऊना में 24, सिरमौर में 19, बिलासपुर में 18, हमीरपुर में 16 और लाहौल-स्पीति में 9 दर्ज हुई हैं।
1200 से ज्यादा मकान हुए नष्ट
मकानों और दुकानों को हुए नुकसान का आंकड़ा भी चिंताजनक है। अब तक 1,265 मकान पूरी तरह ढह चुके हैं और 5,469 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 478 दुकानें और 5,612 गौशालाएं भी जमींदोज हो चुकी हैं। 1,999 पशुओं और 26,000 से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत हुई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रदेश को अब तक 4,306 करोड़ रुपये का सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ है।