हिमाचल में इनका प्रधान बनने का सपना टूटा, पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे ऐसे बेटा-बेटी, पोता और बहू

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं. महज दो दिनों में ग्राम पंचायत सदस्य, उपप्रधान, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए 42,562 उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं. लेकिन चुनावी उत्साह के बीच एक बड़ा सवाल चर्चा में है कि आखिर कौन लोग चुनाव नहीं लड़ सकते? क्योंकि कई ऐसे लोग हैं जो चुनाव तो लड़ना चाहते हैं, लेकिन नियमों के चलते हाथ मलते नजर आ रहे हैं. हाल ही में सरकार ने कई नियमों में बदलाव भी किया है, तो आइए जानते हैं कौन-कौन से ऐसे लोग हैं जो पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.

21 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं होता.
जिसका नाम संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वह चुनाव नहीं लड़ सकता.
अदालत द्वारा दिवालिया घोषित व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है.
मानसिक रूप से अस्वस्थ या विकृतचित्त घोषित व्यक्ति चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होते.
सरकारी कर्मचारी या लाभ के पद (Office of Profit) पर कार्यरत व्यक्ति नियमों के तहत चुनाव नहीं लड़ सकते. गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी और सजायाफ्ता व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकते हैं.

भ्रष्टाचार या चुनावी अनियमितता में दोषी पाए गए व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते.
कोऑपरेटिव सोसाइटी या पंचायत के डिफाल्टर भी चुनाव लड़ने से वंचित रहेंगे.
यदि परिवार के किसी सदस्य ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया हो तो भी उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है.

पंचायत निधि या टैक्स का भुगतान न करने वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी.

जिस व्यक्ति पर पंचायत की रिकवरी लंबित है, वह भी अयोग्य माना जाएगा.

सरकारी सेवा से बर्खास्त व्यक्ति भी पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है.

पब्लिक सेक्टर कर्मचारी भी चुनाव नहीं लड़ सकते.

जिस पर NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज हो.
कई ऐसे कानूनी प्रावधान हैं जिनकी जानकारी न होने के कारण कई उम्मीदवार चुनावी रेस से बाहर हो सकते हैं. इतना ही नहीं, यदि चुनाव जीतने के बाद भी आरोप सिद्ध होते हैं तो जनप्रतिनिधि की कुर्सी भी जा सकती है. इसलिए चुनाव मैदान में उतरने से पहले नियमों को समझना बेहद जरूरी है. इसको लेकर हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 122 में स्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं.

11 मई को नामांकन का आखिरी दिन

प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के लिए 11 मई को दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे. इसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाएगी. 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 14 और 15 मई को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे. इसके बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे.

मंडी जिला में सबसे अधिक नामांकन

प्रदेश में 8 मई को 25,671 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए, जबकि 7 मई को 16,891 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की थी. इस तरह दो दिनों में कुल 42,562 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. जिला वार आंकड़ों में मंडी सबसे आगे रहा, जहां 7,911 नामांकन पत्र दाखिल हुए. वहीं लाहौल-स्पीति में सबसे कम 283 नामांकन हुए.

प्रदेश में 31,182 पदों पर चुनाव

प्रदेशभर में कुल 31,182 पदों पर चुनाव होने हैं. इनमें 21,654 ग्राम पंचायत सदस्य, 3,754 प्रधान, 3,754 उपप्रधान, 1,769 पंचायत समिति सदस्य और 251 जिला परिषद सीटें शामिल हैं. गांव की चौपालों से लेकर जिला मुख्यालय तक चुनावी हलचल तेज हो चुकी है और अब हर किसी की नजर नामांकन प्रक्रिया और चुनावी मुकाबले पर टिकी हुई है.