किसी भी इंसान के जीवन में दुख और सुख का आना जाना लगा रहता है. जब हमारा दोस्त या रिश्तेदार किसी गहरे दुख या सदमें में होता है तो हम कोशिश करते हैं कि उनके दर्द को कम करें, कई बार अच्छी नीयत के बाद भी हम अनजाने में कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिस वजह से दिलासा देने की बजाय हम इंसान को चोट पहुंचा देता है. आइए जानते हैं जब कोई दुख की घड़ी में होता है तो उसे क्या नहीं बोलना चाहिए.
जो होता है अच्छे के लिए होता है
जब इंसान दुखी होता है तो उदाहरण के लिए किसी इंसान की नौकरी चली गई या रिश्ते में धोखे से जूझ रहा है तो यह अच्छा नहीं है, ऐसे में दुखी इंसान को ऐसी बात नहीं बोलना चाहिए. क्योंकि वह इंसान उस समय ये बात सुनने को तैयार नहीं नहीं होता है इससे उनका दर्द बढ़ जाता है. इसकी जगह आप बोल सकते हैं मुझे बहुत अफसोस है कि आप इस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.
मैं समझ सकता हूं कि तुम पर क्या बीत रही है
कोई भी इंसान किसी के भी दुख को समझ नहीं सकते हैं. हर इंसान का दुख और अनुभव बिल्कुल अलग है. चाहे आपके साथ भी वैसी ही घटना घटी हो, फिर भी आपका उनका रिश्ता या परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. वाक्य सामने वाले झुंझलाहट महसूस करा सकता है. इसकी बजाए ईमानदारी से बोलें, मेरे लिए यह सोचना भी मुश्किल है तुम पर क्या बीत रही है.
रोने से कुछ नहीं होगा
समाज में रोने को कमजोरी की निशानी मानी जाती है, जबकि रोना तनाव को बाहर निकालने में मदद करता है.दुखी इंसान को रोने से रोकने से उनकी भावना का गला घोंटना जैसा है. आंसू रुकने से दर्द खत्म नहीं होता, बल्कि वो अंदर ही अंदर इंसान को बीमार कर देता है. ऐसा कहने की जगह उन्हें रोने देना चाहिए. आप उन्हें अपना कंधा दें या टिशू पेपर बढ़ाएं.
अब दूसरों के लिए मजबूत बनना होगा
अक्सर घर के बड़े या किसी भी जिम्मेदार इंसान से ये बात बोली जाती है, लेकिन शोक के समय इंसान अंदर से टूट चुका होता है. उसे यह कहना कि मजबूत बनो उस पर एक और बोझ डाल देता है, उसे लगता है कि उसे अपने दुख को जाहिर करने का हक नहीं है. हर इंसान को पड़ने और टूटने का हक है.