Halim Ke Beejon Ke Laddu: हलिम को इंग्लिश में गार्डन क्रेस सीड्स कहा जाता है, ये दिखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन इसमें सेहत का खजाना छिपा है. न्यू मदर्स के लिए इसे बेहद पौष्टिक माना जाता है. आयुर्वेद में इसे अस्तिक्य बीज या गर्दभ बीज कहा जाता है. इसका नाम भले ही हर किसी ने नहीं सुना होगा, लेकिन सेहत के लिहाज से इसकी अहमियत काफी ज्यादा है.
हलिम के लड्डू खाएं
हलिम डिलिवरी के बाद महिलाओं की कमजोरी दूर करने, दूध बढ़ाने और खून की कमी ठीक करने में मदद करता है. इसलिए कई जगहों पर हलिम के लड्डू नई माताओं को खास तौर पर खिलाए जाते हैं. ये लड्डू स्वाद में भी अच्छे होते हैं और शरीर को ताकत भी देते हैं, इसलिए नॉर्मल हेल्दी लोग भी इन्हें अपनी डेली डाइट में शामिल करते हैं.
कैसे करें तैयार?
हलिम के लड्डू बनाने का तरीका काफी आसान है. पहले हलिम के बीजों को दूध में कुछ घंटे भिगोया जाता है, ताकि वे फूलकर नरम हो जाएं. इसके बाद घी गरम करके इसमें भिगोए हुए हलिम को हल्का-सा भून लिया जाता है. फिर इसमें नारियल, गुड़ और कटे हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद गैस बंद करके इसे थोड़ा ठंडा होने पर लड्डू बनाए जाते हैं. कुछ लोग इसमें इलायची और खसखस भी मिलाते हैं, जिससे लड्डू और भी पौष्टिक बन जाते हैं.
कई परेशानियां होंगी दूर
डिलिवरी के बाद कई महिलाओं को कमजोरी, कमर दर्द, थकान और दूध कम बनने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं. ऐसे में हलिम के लड्डू खाना बेहद फायदेमंद होता है. इससे शरीर में गर्मी और ताकत मिलती है, हड्डियां मजबूत होती हैं और खून की मात्रा बढ़ती है. हलिम आयरन से भरपूर माना जाता है, इसलिए इसे खून की कमी में भी खाया जाता है.
सावधानी भी जरूरी
हालांकि, ये बातें पारंपरिक तजुर्बे और घरेलू मान्यताओं पर आधारित हैं. हर शख्स का शरीर अलग तरह से रिस्पॉन्ड कर सकता है, इसलिए डिलिवरी के बाद किसी भी नई चीज को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है. खासकर अगर किसी को एलर्जी, डायबिटीज या कोई दूसरा हेल्थ प्रॉब्लम हो, तो सावधानी जरूरी है.