ग्वालियर: बदलते दौर के साथ रिश्तों का दरकना आम होता जा रहा है. जिस तेजी से तकनीक, लोगों को करीब लेकर आई, उससे कहीं अधिक तेजी से लोग दूर भी हो रहे हैं. स्मार्ट मोबाइल फोन अब जोड़ने से ज्यादा तोड़ने का काम कर रहा है. भारत ही नहीं पूरी दुनिया भर में स्मार्ट फोन लोगों के बीच दूरियां बढ़ा रहा है. स्मार्ट मोबाइल फोन ने नई नस्ल को अपना दीवाना बना दिया है, जिसके बगैर उनका जीना मुश्किल हो गया है. ऐसे में बच्चों से लेकर बड़ों तक के स्क्रीन टाइम बेतहाशा बढ़े हैं. जन्मों तक साथ निभाने के रिश्ते घंटों में टूट रहे हैं. ये समाज का वो दर्द है जिसे बच्चों से ज्यादा उनके मां और बाप को भोगना पड़ रहा है.
मां-बाप बड़े नाजों से बच्चों को पालते हैं, बड़ा करते हैं, पढ़ाई लिखाई कराकर उनकी शादी कराते हैं इस उम्मीद में की, वे जन्म जन्मंतर के रिश्तों को निभायेंगे और एक सुखी जीवन बिताएंगे. लेकिन इन रिश्तों पर तकनीक की नजर लग रही है. आज के दौर में मोबाइल फोन रिश्तों में शक और विश्वास की डोर को कमजोर करने का काम भी कर रहा है. ग्वालियर के महिला थाने में आने वाले घरेलू विवादों में हर तीसरा रिश्ता मोबाइल की वजह से टूटने की कगार पर है.
पति पत्नी के बीच छोटे मोटे विवाद व झगड़े सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन ये विवाद अब पुलिस तक पहुंचने लगे हैं. ग्वालियर महिला थाने में हर महीने सैंकड़ों ऐसे विवाद सामने आ रहे हैं जहां दंपति वैवाहिक जीवन को खत्म करने की जिद्द पर अड़ जाते हैं. ज्यादातर केस में वजह पति या पत्नी का मोबाइल फोन होता है. कुछ केसों में तो पुराने दोस्तों से बातचीत शक पैदा कर चुका है, तो कुछ मामले पति या पत्नियों के फोन से चिपके रील देखते या बनाते रहने की वजह से बिगड़ रहे हैं और इसकी वजह से घर कलेश का अखाड़ा बन रहा है.
मोबाइल की वजह से होने वाले झगड़े आए दिन अब ग्वालियर के पड़ाव स्थित महिला थाने पहुंच रहे हैं, जहां शादीशुदा दंपत्ति अपने दिल की भड़ास थाने के परिवार परामर्श केंद्र में निकालते हैं. चौंकने वाली बात तो ये है कि हर 10 में से तीन मामले मोबाइल और इसकी वजह से पैदा होने वाला शक है. ग्वालियर महिला थाने के परामर्श केंद्र की काउंसलर अर्चना शर्मा ने बताया की, “एक महीने में महिला थाने में 168 केस पति पत्नी के बीच घरेलू विवाद के आए हैं जिनमें लगभग 30 से 40 फीसदी मोबाइल और शक की वजह से खड़े हुए”.
काउंसलर के मुताबिक – केस 1- करीब एक महीने पहले ग्वालियर के ग्रामीण क्षेत्र से एक मामला सामने आया था. इस मामले में दंपति की शादी को सिर्फ 7 महीने हुए थे, जबकि नवविवाहिता उस वक्त गर्भवती थी. शादी के सात महीने पर ही उसे 9 महीने का बच्चा पैदा हुआ. पति का आरोप था कि, वह बच्चा किसी दूसरे का है, बातचीत में पत्नी ने इस बात को स्वीकार भी कर लिया. शादी के बाद से ही नवविवाहिता अपने फोन पर किसी से बात करती थी, इसी से पति को शक हुआ और इसके सबूत भी उसके पति ने अपने पास इकट्ठा किया. लेकिन पत्नी गलती स्वीकार करने के बाद भी पति को ही धमकाती थी. हम अभी उनकी काउंसलिंग करा रहे.
केस 2- ग्वालियर में नई सड़क इलाके में रहने वाली एक नवविवाहिता ने कुछ दिन पहले ही थाने में शिकायत दर्ज करायी थी. उसकी शादी को सिर्फ दो महीने हुए हैं, पति को शक है कि, वह मोबाइल पर चैटिंग करती है और उसका किसी से अफेयर है. जबकि पत्नी का कहना है की, वह जिससे बात करती है वह उसका स्कूल फ्रेंड है और वह शुरू से ही उससे बातचीत करती रही है. उसका अफेयर जैसा कुछ नहीं है. इस मामले में शादी दांव पर लगी है, पति अपनी पत्नी को साथ रखने को तैयार नहीं है, जबकि काउंसलर के मुताबिक लड़की गलत नहीं है. इसलिए उनकी काउंसलिंग करायी जा रही है जिससे एक नया शुरू हुआ रिश्ता ख़त्म न हो जाये.
केस 3 – ग्वालियर के बहोड़ापुर इलाके में एक महिला ने महिला थाना में शिकायत की थी कि, उसका पति उस पर दोस्तों से चैट और इंस्टाग्राम चलाने की वजह से शक करता है और अक्सर इसकी वजह से झगड़ता है. आए दिन के झगड़े बढ़ते गए और आखिर में इस बात से तंग आकर वह अपने पति का घर छोड़ कर मायके रहने लगी. हालांकि, जब मामला महिला थाने तक पहुंचा तो दोनों को परामर्श के लिए बुलाया गया और काउंसलिंग में यह बात निकल कर आई की दोनों के बीच आपसी संवाद की कमी थी. काउंसलिंग के सकारात्मक परिणाम रहे और अब दोनों साथ में खुशहाल हैं.
एक ओर जहां मोबाइल फोन के चलते लोगों के परिवार टूट रहे हैं, वहीं इसका असर दुनिया भर में बर्थ रेट पर पड़ रहा है. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी की एक रिसर्च के मुताबिक “दुनिया भर में आबादी से जुड़ी तस्वीर भी बदल रही है. भारत में करीब 3 दशक पहले महिलाएं औसतन 3.4 बच्चों को जन्म देती थीं, लेकिन भारत सरकार के मुताबिक अब ये आंकड़ा 2.0 तक पहुंच गया है. कई देशों में तो महिलाएं अब बच्चों को जन्म ही नहीं देना चाहतीं.” रिपोर्ट में दावा किया गया है स्मार्ट फोन और सोशल मीडिया के चलते ऐसे हालात बने हैं.
एक ओर जहां इस तरह के मामले रिश्तों से खिलवाड़ को दर्शा रहे हैं, वहीं परिवार परामर्श केंद्र इन रिश्तों को बचाने के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है. काउंसलर अर्चना शर्मा कहती हैं कि, “परामर्श केंद्र में हमारा प्रयास होता है कि, यदि पति पत्नी के बीच कोई ऐसा छोटा मोटा विवाद है जिससे दोनों के आगे का जीवन अच्छा हो सकता है तो परामर्श के जरिए उसे सुलझाने का प्रयास किया जाता है. खासकर अगर उनके बच्चे हों तो ये और भी अहम हो जाता है. इसलिए पूरा प्रयास किया जाता है कि, परिवार ना टूटे और करीब 60 से 70 फीसदी मामलों में काउंसलिंग का असर भी होता है. पति पत्नी दोबारा जुड़ जाते हैं. हालांकि सुलह कराने के बाद भी उन पर नजर रखी जाती है जिससे दोबारा झगड़े की स्थिति दोनों के बीच न बने.