मध्य प्रदेश में 30 साल का अवैध कब्जा ध्वस्त, 21 बीघा जमीन पर चला प्रशासन का बुलडोजर

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी जमीन पर जमे रसूखदार कब्जाधारियों का खेल खत्म कर दिया। टीम ने 21 बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। इस जमीन पर पिछले 30 साल से रसूखदार लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने दोबारा कब्जा करने पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी जमीन पर जमे रसूखदार कब्जाधारियों का खेल खत्म कर दिया। टीम ने 21 बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। इस जमीन पर पिछले 30 साल से रसूखदार लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। जिले के महिदपुर तहसील में प्रशासन ने अतिक्रमण पर सीधा प्रहार किया। कढ़ाई गांव में सरकारी जमीन पर जमे रसूखदार कब्जाधारियों का खेल खत्म करते हुए 21 बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराया।

30 साल से अवैध कब्जा
तहसीलदार संतुष्टि पाल के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने 5 मई 2026 को मौके पर पहुंचकर करीब 21 बीघा बेशकीमती जमीन से अतिक्रमण हटवाया। ये जमीन सर्वे नंबर 665/779/1, 665/779/2 और 665/779/3 में दर्ज थी, जिस पर पिछले तीन दशकों यानी 30 साल से अवैध कब्जा था। प्रशासन द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए। चेतावनी भी दी गई, लेकिन कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया।

जेसीबी से ढहाए गए अवैध निर्माण
इस पूरे कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही। जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माणों को हटाया गया और पूरी जमीन को कब्जामुक्त कराया गया। कार्रवाई पूरी होते ही इन जमीनों पर ‘शासकीय भूमि’ का बोर्ड भी लगा दिया गया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम या अवैध कब्जे की कोशिश न हो।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
तहसीलदार संतुष्टि पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी ने दोबारा कब्जा करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें एफआईआर से लेकर अन्य दंडात्मक कदम शामिल होंगे।

इलाके में हड़कंप
इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। अतिक्रमणकारियों में डर साफ देखा जा रहा है, वहीं आम ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस जमीन को लेकर विवाद और असंतोष बना हुआ था, लेकिन अब प्रशासन की सख्ती से न्याय हुआ है।