मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सड़कों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें, जानिए किन जिलों से होगी शुरुआत

इंदौर: मध्य प्रदेश की सड़कों पर एक बार फिर से सरकारी बसें दौड़ती हुई नजर आने वाली है, क्योंकि मोहन सरकार राज्य में फिर से सरकारी बसें चलाने वाली है, इस सुविधा को सरकार ने ‘जनबस’ नाम दिया है, राज्य परिवहन निगम की जगह पर अब एमपी सरकार ने यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है, यह कंपनी राज्य के 25 जिलों में सरकारी बसों का संचालन करेगी, सालों पहले बंद हो चुकी सरकारी बसों की शुरुआत एमपी के सबसे बड़े शहर इंदौर से होने वाली है, जहां से सबसे पहले बसों का संचालन किया जाएगा.

अप्रैल 2026 से होगी शुरुआत
मध्य प्रदेश में फिर से सरकारी बसों की शुरुआत अप्रैल 2026 से होने जा रही है. जनबस सेवा की शुरुआत राज्य की आर्थिक राजधानी इंदौर से होगी, इसके बाद यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से राज्य के दूसरे संभागों में भी लागू की जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल 2027 तक यह प्रणाली सभी संभागों और जिलों में लागू हो जाए. हालांकि अभी सरकार ने केवल 25 जिलों का चयन किया है, जहां कंपनी के संचालक मंडल ने राज्यभर में 6,000 रूटों को मंजूरी दी है, इन रूटों पर 10,879 बसों का संचालन किया जाएगा, जिसमें शहरी के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर भी बसों का संचालन किया जाएगा.

पहले चरण में इंदौर और आसपास के लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में जनबसों का संचालन किया जाएगा, इसेक बाद उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा और चंबल तक विस्तारित किया जाएगा, कुल मिलाकर नई व्यवस्था 25 जिलों के रूट नेटवर्क को कवर करेगी. योजना के सफल होने के बाद बसों का संचालन दूसरे जिलों में भी किया जा सकता है.

बसों में होगी सुविधा
मध्य प्रदेश में चलने वाली सरकारी बसों में सभी तरह की सुविधाएं दी जाएगी, जिसमें यात्रियों को आरामदायक सफर का आनंद मिलेगा. बसों में रूट प्रबंधन और निगरानी होगी, जबकि निजी ऑपरेटर बसें उपलब्ध कराएंगे व चलाएंगे किराया निर्धारण का फॉर्मूला पारदर्शी होगा, जिसे वैज्ञानिक आधारों पर तय किया जाएगा. बसों में यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा और सभी सुविधाएं होगी. माना जा रहा है कि नई बसें सड़कों पर उतरने से पुरानी हो चुकी बसों पर भी लगाम लगेगी और परमिट की समीक्षा होगी और धीरे-धीरे पुरानी बसों को हटाया जाएगा.