MP में यहां किसान ने इस मांग के लिए छोड़ा शर्ट और चप्पल पहनना, जानिए इसके पीछे की रोचक कहानी

Burhanpur Farmer Unique Protest: अभी तक आपने लोगों को धरना प्रदर्शन और आंदोलन करते हुए तो देखा होगा लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के खकनार में रहने वाले किसान एक ऐसे किसान ने जिन्होंने अपने बदन पर शर्ट और पैरों में चप्पल पहनना एक मांग के लिए पहनना छोड़ दिया है. जिले में सबसे अधिक उत्पादन होने वाली केला की फसल बीमा सरकार लागू करे, इसके लिए उन्होंने एक अनोखा विरोध किया है. उन्होंने इस तरह से अपना विरोध शुरू कर दिया है कि उन्होंने अपने खुद के बदन पर शर्ट पहनना और पैरों में चप्पल पहनना छोड़ दिया. उनके मुताबिक, जब तक सरकार जिले में फसल बीमा लागू नहीं करेगी तब तक मैं शर्ट और चप्पल नहीं पहनूंगा और इस विरोध को देखकर उनके साथ और भी किसान जुड़ रहे रहे हैं.

किसान ने दी जानकारी
लोकल18 की टीम ने जब किसान किशोर वासनकर से बात की तो उन्होंने बताया कि बुरहानपुर जिले में सबसे अधिक 25 हजार हेक्टेयर में केले की फसल किसान लगाते हैं. लेकिन यहां पर सरकार केला फसल बीमा लागू नहीं कर रही है. 7 साल से हम लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है. पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में केला फसल बीमा लागू है, जिससे किसानों का नुकसान होने पर उन्हें बीमा की राशि मिल जाती है. जिससे किसान अपनी भरपाई कर लेते हैं. लेकिन बुरहानपुर जिले में 7 सालों से सबसे अधिक केला फसल को नुकसान हो रहा है. लेकिन आज तक भी फसल बीमा लागू नहीं हुआ है. इसके लिए मैंने यह विरोध शुरू कर दिया है. अब मेरे साथ किसान भी जुड़ते जा रहे हैं और यह संख्या एक से बढ़कर अब सैकड़ों हो गई है.

सड़कों पर उतर आए किसान
किसानों का कहना है कि बुरहानपुर जिले में 25 हजार ट्रैक्टर में केले की खेती होती है. लेकिन यहां पर केला फसल बीमा लागू नहीं होने के कारण किसानों को सबसे अधिक नुकसान झेलना पड़ता है. कई बार किसान ज्ञापन आवेदन और जनप्रतिनिधि और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से मुलाकात कर यह मांग रख चुके हैं लेकिन आज तक भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. इसको लेकर अब किसानों ने इस तरह से विरोध करना शुरू कर दिया है. किसानों का कहना है कि सरकार हमको नुकसान होने पर मुआवजा देती है लेकिन जिस तरह मुआवजा मिलना चाहिए वह मुआवजा नहीं मिलता है और नाम मात्र काम दे दिया जाता है. जिससे हमारे खेतों में पड़ी हुई फसलों को फेंकने की राशि भी नहीं मिलती है.