‘मैं बहुत परेशान हूं, नवीन के बिना नहीं रह पाऊंगी… सॉरी’, 19 साल की लड़की ने बनाया वीडियो, फिर दे दी जान

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर और खरगोन में हाल ही में युवाओं की दो अलग-अलग मौतों ने लोगों को सकते में डाल दिया है. ये घटनाएं न केवल परिवारों के लिए दुखद हैं, बल्कि युवाओं की मेंटल कंडीशन और शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में 19 वर्षीय छात्रा प्रियांशी राव ने 24 नवंबर को फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. वीडियो में प्रियांशी रोते हुए कहती नजर आ रही हैं कि इन्होंने मुझे पागल कर दिया है, मैं बहुत परेशान हूं. मैं नवीन के बिना नहीं रह पाऊंगी… सॉरी. वीडियो में वह यह भी कहती हैं कि भूमि और नवीन को सजा दिलाई जाए. इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने भूमि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि आरोपी नवीन अभी भी फरार है. यह मामला युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, उनके व्यक्तिगत तनाव और रिश्तों में दबाव को उजागर करता है.

बी फार्मेसी के छात्र ने खाई जहरीली दवा
वहीं, खरगोन जिले के बोरावां क्षेत्र में बी फार्मेसी कॉलेज के छात्र सचिन जायसवाल ने जहरीली दवाई खाकर आत्महत्या कर ली. मृतक छात्र बी फार्मेसी सेकंड ईयर का था और खंडवा जिले के गुड़ी का रहने वाला था. जानकारी के अनुसार, सचिन ने जहरीली दवाई लेने के बाद हॉस्टल में अपने साथी छात्रों को बताया और उन्हें जिला अस्पताल खरगोन में भर्ती कराया गया. हालांकि, उपचार के दौरान छात्र की मौत हो गई. मृतक के भाई ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कॉलेज के वार्डन और टीजी शिक्षक कौशल पटेल ने हॉस्टल से छुट्टी नहीं दी और छात्रों को प्रताड़ित किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने उनकी कोई सुध नहीं ली, जिससे छात्र मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या करने को मजबूर हुआ.

दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना, पारिवारिक समर्थन देना और कॉलेजों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना अत्यंत जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समय पर सहायता, सही मार्गदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है. इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या शिक्षा संस्थान और स्थानीय प्रशासन अपने जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभा रहे हैं. ऐसे मामलों ने समाज और सरकार को चेतावनी दी है कि मेंटल हेल्थ, छात्रों की सुरक्षा और समय पर सहायता प्रदान करना अब और जरूरी हो गया है.