मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को मिलेंगे 400 करोड़ रुपए: हाईकोर्ट ने सरकार को दिया एरियर देने का आदेश

भोपाल: मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन में की गई कटौती को अवैध करार दिया है। राज्य सरकार को आदेश दिया है कि जिन कर्मचारियों की सैलरी काटी गई है, उन्हें एरियर्स समेत पूरी रा

बता दें कि साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ये नियम लागू किया था। इसके तहत नई भर्तियों में कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान 70%, 80% और 90% वेतन दिया जा रहा था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने कहा- जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम ले रही है, तो प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार इस पर मंथन कर रही है कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देना है या फिर कर्मचारियों को एरियर की राशि देना है। इस पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री लेंगे। यदि सरकार कर्मचारियों को राहत देती है तो कितने कर्मचारियों को एरियर का फायदा मिलेगा और ये किस तरह से मिलेगा?

शिवराज सरकार का अधूरा वादा और कोर्ट तक मामला साल 2020 में एमपी में सत्ता परिवर्तन हुआ। कमलनाथ सरकार गिर गई और एक बार फिर शिवराज सरकार सत्ता में आई। साल 2023 के विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस नियम को बदलने की घोषणा की थी। उन्होंने चुनावी सभाओं में कहा था कि प्रोबेशन पीरियड को चार साल से घटाकर वापस दो साल किया जाएगा।

मगर, यह घोषणा कभी धरातल पर नहीं उतर सकी। सरकारी वादे के पूरा न होने और लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान के कारण कर्मचारियों ने अंततः न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने 2019 के GAD परिपत्र को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणी कीं।

समान काम, समान वेतन” का सिद्धांत कोर्ट ने कहा कि जब सरकार कर्मचारियों से 100% काम ले रही है, तो प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती का कोई भी औचित्य नहीं है। “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत एक मौलिक अधिकार है और यह प्रोबेशन अवधि में भी पूरी तरह से लागू होगा।

भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण नियम अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि राज्य में एक ही समय पर भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए दो अलग-अलग नियम चल रहे थे। मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग (MPPSC) से चयनित अधिकारियों के लिए प्रोबेशन पीरियड केवल 2 साल का था और उन्हें पहले साल से ही पूरा वेतन मिल रहा था। वहीं, कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती कर्मचारियों को 3-4 साल तक कटौती वाला वेतन मिल रहा था। हाईकोर्ट ने इसे सीधे तौर पर भेदभावपूर्ण और नैसर्गिक न्याय के खिलाफ माना।

एरियर भुगतान के सख्त निर्देश अदालत ने राज्य सरकार को यह सख्त निर्देश दिया है कि जिन भी कर्मचारियों का वेतन इस अवैध नियम के तहत काटा गया है, उन्हें पूरी राशि एरियर के रूप में लौटाई जाए। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को 100% वेतनमान के हिसाब से जो भी राशि कम मिली है, वह पूरी राशि उन्हें एकमुश्त दी जाएगी। कर्मचारियों को कितना और कैसे मिलेगा फायदा? इस फैसले से दिसंबर 2019 से लेकर दिसंबर 2025 तक भर्ती हुए 94300 कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

प्राथमिक शिक्षक: जनवरी 2020 में भर्ती हुआ एक प्राथमिक शिक्षक, जिसका पे-ग्रेड 2400 रुपए था, उसे इस फैसले से लगभग 3 लाख 55 हजार रुपए का एरियर मिलेगा। यह राशि उसके तीन साल के वेतन में हुई कटौती (पहले साल 30%, दूसरे साल 20% और तीसरे साल 10%) के बराबर है।सहायक ग्रेड-3: इसी तरह, 1900 पे-ग्रेड पर भर्ती हुए एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी को लगभग 2 लाख 85 हजार रुपए का फायदा होगा।

किन पदों के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?

यह फैसला मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा आयोजित लगभग सभी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों पर लागू होगा। इनमें प्रमुख पद शामिल हैं:

लिपिक वर्ग( तृतीय श्रेणी): सहायक ग्रेड-3, वरिष्ठ सहायक, स्टेनो, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लेखापाल व सहायक लेखापाल।
अलिपिक वर्ग: पटवारी, तकनीशियन, विभिन्न विभागों में सहायक।
इंजीनियरिंग: सब-इंजीनियर (सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल), असिस्टेंट इंजीनियर।
तकनीकी पद: प्रयोगशाला तकनीशियन, बायोमेडिकल इंजीनियर, फील्ड ऑफिसर।
निरीक्षक पद: निरीक्षक (नाप-तौल), स्वच्छता निरीक्षक, जूनियर सप्लाई ऑफिसर।
अन्य पद: सहायक प्रबंधक, सहायक मानचित्रकार आदि।
चतुर्थ श्रेणी: सहायक ग्रेड-3, स्टेनोग्राफर, स्टेनो-टाइपिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, कोडिंग क्लर्क।

ग्राम पंचायत/जनपद स्तर पर: चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य, सफाई कर्मी।
नगर निगम/नगरपालिका स्तर पर: बेलदार, माली, चपरासी आदि।
कर्मचारी संगठन बोले- सरकार को आदेश निकालना चाहिए तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने वित्तीय हालातों को देखते हुए ये फैसला लिया था। लोक सेवा आयोग से भर्ती कर्मचारियों के लिए ये नियम नहीं था, लेकिन कर्मचारी चयन आयोग से भर्ती कर्मचारियों पर ये आदेश लागू किया था। ये काला आदेश था।

इससे तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नुकसान हो रहा था। फोर्थ क्लास को मूल वेतन का 1 लाख 74 हजार रुपए का नुकसान था। वहीं ऊपरी स्तर पर 4 लाख से ज्यादा का नुकसान हो रहा था। पूरे सेवा काल में ये एक कर्मचारी के लिए करीब 10-20 लाख रु. का नुकसान है।

​​सरकार के सामने अब क्या

कल्प? हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद राज्य सरकार के पास सीमित विकल्प बचे है।

फैसले को लागू करना: सरकार अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए तत्काल प्रभाव से कर्मचारियों को एरियर का भुगतान शुरू कर सकती है। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा, लेकिन राजकोष पर 2500 करोड़ रुपए का भारी बोझ भी पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: दूसरा विकल्प यह है कि सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे। हालांकि, कानून के जानकारों का मानना है कि चूंकि यह फैसला “समान काम, समान वेतन” और समानता के मौलिक अधिकारों जैसे मजबूत कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना बहुत कम है।