बच्चों को रील, मोबाइल एडिक्शन से बचाएगी मोहन सरकार, निजी स्कूल नहीं कर सकेंगे मनमानी

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार का स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही स्कूली बच्चों को मोबाइल और रील की लत से बचाने के लिए एक मॉड्यूल तैयार कराने जा रहा है. इसके तहत स्कूली बच्चों के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जाएगा. इसमें बच्चों को मोबाइल का बेहतर उपयोग करना और इसके दुरुपयोग से बचने के बारे में बताया जाएगा. बच्चे स्कूल के दिनों में रील की लत और मोबाइल के दुरुपयोग से कैसे बचें इन सब बातों को लेकर बच्चों को जागरूक किया जाएगा.

इसलिए पड़ी अवेयरनेस प्रोग्राम की जरूरत

दरअसल रतलाम के एक स्कूल में रील बनाने और निरंतर देखने को लेकर एक 13 वर्षीय बच्चे को स्कूल प्रबंधन ने फटकार लगाई थी. साथ ही आठवीं के इस छात्र से उठक-बैठक भी लगवाई गई थी. इस बात से वह इतना डर गया कि उसने आत्महत्या कर ली. इस मामले को लेकर जौरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण लगाया था. इस मामले में विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अपने जबाव में बताया कि अब सरकारी और निजी दोनों ही प्रकार के स्कूलों में बच्चों को मोबाइल और रील की लत से बचाने के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जाएगा.

अभिभावकों के साथ नहीं होगी लूट

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने बताया कि इस बार मध्य प्रदेश सरकार ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले सभी सरकारी स्कूलों में सिलेबस भेज दिया था. लेकिन अगले साल से हम यह व्यवस्था कर रहे हैं कि शासकीय स्कूलों में हम जो मुफ्त में सिलेबस भेजते हैं, वह तो भेजेंगे ही. साथ ही हम बहुत न्यूनतम दरों पर निजी स्कूलों के बच्चों को भी सिलेबस उपलब्ध कराएंगे. जो 400-450 रुपये से नीचे होगी. राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि हम पहली क्लास का सिलेबस तो डेढ़ सौ, पौने दो सौ रुपये में उपलब्ध कराएंगे. जिससे अभिभावकों को सिलेबस खरीदने में हो रही लूट से बचाया जा सके.

ब्लॉक स्तर पर मेले लगाकर देंगे किताबें

राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर प्राइवेट संस्थाओं के बच्चों को रियायती दरों पर सिलेबस उपलब्ध कराने के लिए मेलों का आयोजन किया जाएगा. जहां से बच्चों के अभिभावक सिलेबस खरीद सकेंगे. सरकार इनको अपनी तरफ से सिलेबस उपलब्ध कराएगी. प्राइवेट संस्थान जो बच्चों को उनकी बताई हुई दुकानों से सिलेबस व यूनीफार्म खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, उससे मुक्ति मिलेगी. मंत्री ने बताया कि पिछले साल हमने जिला मुख्यालयों पर इस तरह का प्रयोग किया था, वह बहुत सफल था. उसे हम नीचे तक ले जा रहे हैं और शासकीय स्तर पर पुस्तकें प्रिंट कराकर निजी स्कूलों के बच्चों को उपलब्ध कराएंगे.

सीबीएसई और आईसीएससी स्कूलों पर भी शिकंजा

मंत्री ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में भी सिलेबस और यूनीफार्म के नाम पर जो अतिरिक्त राशि ली जाती है, उस पर लगाम लगाने की तैयारी चल रही है. शिकायत, फिर जांच और इसके बाद कार्रवाई का जो मैकेनिज्म है, उसे और पारदर्शी बनाया गया है. जिससे आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे. उन्होंने कहा कि दो साल में हमारी सरकार ने फीस नियामक आयोग को सख्त किया है. कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति है जो लगातार इसको मॉनिटर करती है. यदि आप फीस बढ़ाएंगे तो आपको ऑनलाइन अपलोड करना पड़ेगा.

मोबाइल की लत से बढ़ रही मानसिक बीमारी

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने बताया कि बीते 15 सालों में 10 से 24 वर्ष के बच्चों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हुई है. इसका बड़ा कारण बच्चों में मोबाइल और रील की लत है. उनका कहना है कि अपने बच्चों को बचाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता खुद बच्चों का स्क्रीन टाइम तय करें और सोशल मीडिया पर उनकी आदतों पर नजर रखें. अधिकतर बच्चे बिना सोचे-समझे मोबाइल में रील को स्क्रॉल करते रहते हैं, इससे बचाने के लिए बच्चों को आउटडोर गेम्स व दोस्तों के संपर्क में आने देना चाहिए.