भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 3 दिन के भीतर फिर दोहराया है कि मध्य प्रदेश में इसी महीने विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता यानि यूसीसी प्रस्ताव लाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हिंदू का कानून अलग, मुस्लिम का कानून अलग ऐसा क्यों होना चाहिए. एक देश एक विधान एक प्रधान और एक राष्ट्रगान ही होगा.
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शाजापुर के कालापीपल पहुंचे थे. जहां उन्होंने कई कामों के लोकार्पण और भूमिपूजन के साथ कालापीपल को 30.86 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी और ये ऐलान किया. मध्य प्रदेश में लिव इन को लेकर सरकार यूसीसी में जरुरी प्रावधान कर सकती है. नई पीढ़ी की इस नई रिलेशनशिप में अब जुड़ना और अलग होना इतना आसन नहीं होगा.
अलग-अलग कानूनों की जरुरत नहीं, सबके लिए एक कानून
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा, “अभी तो कांग्रेसियों को और बड़ा झटका लगने वाला है. हमारे यहां हिंदू का कानून अलग, मुसलमान का कानून अलग, ये अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए. कानून एक ही होना चाहिए. मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं, उनके साथ जो होता है अब वो नहीं चलेगा. इन बहनों के आत्मसम्मान के लिए एक देश-एक विधान-एक प्रधान-एक राष्ट्रगान आवश्यक है.”
विधानसभा मानसून सत्र में इसी महीने लाया जाएगा यूसीसी प्रस्ताव
उन्होंने कहा कि इसलिए हम इसी महीने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने करने का प्रयास करेंगे. 3 दिन पहले भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था कि मध्य प्रदेश में यूसीसी इसी महीने लागू होगा.
तैयारी पूरी करने समिति का कार्यकाल भी बढ़ाया
समान नागरिक संहिता के लिए जो कमेटी गठित की गई थी, उसका कार्यकाल बीते महीने की 26 जून को ही खत्म हो गया था. लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर 26 जुलाई कर दिया ताकि मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पेश किया जा सके. कानून कैसे लागू होगा, इसके अंतर्गत क्या निगम प्रक्रिया होगी. इसका पूरा ड्राफ्ट समिति की ओर से तैयार किया जाएगा.
मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर राज्य सरकार ने जो 6 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी बनाई है. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. इनके अलावा जो अन्य सदस्य बनाए गए हैं, उनमें रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सोशल एक्टिविस्ट बुधपाल सिंह और अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया हैं.
सुझावों को शामिल करके तैयार होगा यूसीसी का ड्राफ्ट
यूसीसी लागू करने से पहले समिति की ओर से समाज के बीच लंबा विचार विमर्श किया गया. समिति ने अलग-अलग शहरों में समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद किया और सुझाव मांगे. इसके बाद समिति को मध्य प्रदेश भर से 9 लाख से ज्यादा सुझाव लोगों के मिले. जिसमें अलग-अलग माध्यमों के जरिए लोगों ने अपने सुझाव दिए. 4 लाख लोग इसमें वो थे जिन्होंने डिजिटली अपना सुझाव और अपना मत रखा. सुझावों की स्टडी करने के बाद इनमें से छंटनी की जाएगी और यूसीसी का जो ड्राफ्ट तैयार होगा उसमें भी इन्हें शामिल किया जाएगा.
लिव इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन हो सकता है जरुरी
मध्य प्रदेश में यूसीसी के मसौदे में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर खास अनिवार्यता की जा सकती है. इसमें लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किए जाने की संभावना है. अब तक इस रिश्ते में किसी तरह की बाध्यता नहीं है लेकिन मध्य प्रदेश में यूसीसी के दायरे में माना जा रहा है कि इसमें महत्वपूर्ण बिंदु जोड़ा जाएगा. जिसमें केवल जुबानी रिश्ता जोड़ने या तोड़ने की कंडीशन खत्म होगी और जिस तरह से शादी में 2 लोग अलग होते हैं उसी तरह की प्रोसेस इसमें भी अपनाई जाएगी.