UCC in Madhya Pradesh-मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर ने प्रदेश सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. सरकार का लक्ष्य है कि दिवाली 2026 तक प्रदेश में यूसीसी लागू किया जाए. इसके लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने अपना रोडमैप भी तैयार कर लिया है, जिसके तहत इसी महीने से जिलों में जुनसुनवाई होगी. साथ ही कमेटी आदिवासियों की परंपराओं को अध्ययन करेगी. लेकिन प्रदेश में यूसीसी की सुगबुगाहट के साथ ही राजनीतिक पारा भी चढ़ने लगा है. आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार को चेतावनी दी है. विक्रांत भूरिया ने कहा कि सरकार आदिवासियों को यूसीसी में शामिल करने का विचार भी न करे. अगर ऐसा किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा.
जिलों में होगी जनसुनवाई
UCC के लिए बनाई गई कमेटी की हाल में ही एक बैठक हुई जिसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. UCC लागू करने से पहले जिलों में जनसुनवाई होगी.कमेटी इसी महीने जिलों में जनसुनवाई शुरू करेगी.कमेटी आदिवासियों की परंपराओं का अध्ययन करेगी. इसके लिए दिल्ली और भोपाल में दो दफ्तर शुरू होंगे. वहीं बैठक में मध्य प्रदेश की स्थानीय परिस्थितियों, सामाजिक, सांस्कृतिक प्रथाओं, मान्यताओं और परंपराओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई.
10 दिन बाद होगी दूसरी बैठक
कमेटी के सदस्यों को उत्तराखंड और गुजरात के UCC ड्राफ्ट उपलब्ध कराए गए. अगले 10 दिनों में दूसरी बैठक होगी. कमेटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 60 दिनों के भीतर सरकार को सौंपनी है. मध्यप्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए कमेटी आदिवासियों की परंपराओं, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं और मान्यताओं का गहन अध्ययन करेगी. सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है.
‘आदिवासियों को शामिल किया तो सड़क पर उतरेंगे’
UCC को लेकर प्रदेश में राजनीतिक पारा चढ़ गया है. आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों को यूसीसी में शामिल करने का विचार भी न करे. जल,जंगल और जमीन पर आदिवासियों का हक है और वे ही इस देश के असली मालिक हैं. यदि उनके अधिकारों और परंपराओं से छेड़छाड़ की गई, तो पूरा समाज सड़कों पर उतरेगा और पुरजोर विरोध किया जाएगा.