मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (आराजनीतिक) के पदाधिकारियों समेत लगभग 400 अज्ञात किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई 3 जनवरी को पुलिस कार्यालय पर बिना अनुमति किए गए धरना प्रदर्शन के संबंध में की गई है। प्रदर्शन प्रदूषण और दिल्ली से आ रहे प्रतिबंधित कचरे (RDF) को ईंधन के रूप में जलाए जाने के विरोध में किया गया था।
पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन के दौरान भाकियू कार्यकर्ताओं ने शहर की विभिन्न सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों को अव्यवस्थित ढंग से खड़ा कर दिया था। इससे शहर में कई स्थानों पर भारी जाम लग गया, जिससे आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में भाकियू के चार नामजद पदाधिकारियों सहित लगभग 400 अज्ञात किसानों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, बिना अनुमति के प्रदर्शन करने और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने प्रदर्शन में प्रयुक्त एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों को कब्जे में लेकर सीज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इन वाहनों के कारण शहर में यातायात व्यवस्था बाधित हुई और कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
सीओ सिटी सिद्धार्थ कुमार मिश्रा ने बताया कि बिना अनुमति पुलिस कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी मिली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, इस मामले में भारतीय किसान यूनियन (राजनीतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनपद में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, और दिल्ली से आने वाला प्रतिबंधित कचरा यहां की औद्योगिक इकाइयों में ईंधन के रूप में प्रयोग हो रहा है। मलिक ने दावा किया कि वे केवल इस विषय पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर से मिलने गए थे, कोई धरना प्रदर्शन नहीं हुआ था।