होमगार्ड के हत्यारे को फांसी की सजा, अदालत ने कहा- कानून के प्रहरी पर हमला

मुजफ्फरनगर। छह वर्ष पुराने होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट-3) ने दोषी दीपक को फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कानून के रक्षक की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि समाज के विधि शासन में विश्वास पर हमला है। जब कानून का प्रहरी गिरता है, तो केवल एक वर्दी नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा का विश्वास भी लहूलुहान होता है। यह उस हाथ पर प्रहार है, जो समाज में शांति व्यवस्था और न्याय की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम मामलों’ में शामिल मानते हुए कठोरतम दंड दिया। दोषी दीपक पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार, अधिवक्ता हिमांशु कौशिक ने बताया कि गांव लकड़संधा निवासी रतिराम नगर कोतवाली में होमगार्ड थे। चार जून 2020 की रात लगभग 10:15 बजे कांस्टेबल इस्लाम के साथ रतिराम बाइक से गश्त कर रहे थे। तभी बुढ़ाना मोड़ की डीलर वाली गली नंबर-3 के मकान से महिला के चीखने की आवाज आई। कांस्टेबल व होमगार्ड मकान के अंदर पहुंचे। यहां दीपक अपनी मां राजबाला को पीट रहा था।

दीपक को रोकने का प्रयास किया तो उसने होमगार्ड रतिराम के पेट में चाकू घोंप दिया। गंभीर रूप से घायल होमगार्ड का मेरठ मेडिकल कालेज के अस्पताल में चार माह तक उपचार चला। चार अक्तूबर 2020 को उनकी मौत हो गई थी। होमगार्ड के पुत्र अर्जुन की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मुकदमे में 13 गवाह पेश किए गए।

गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर के न्यायालय ने माना कि होमगार्ड की आन ड्यूटी निर्ममता से हत्या की गई थी। न्यायालय ने सजा के दौरान अमेरिका के टेक्सास में पुलिस अधिकारी डेविड सेरार्ड की हत्या के मामले में दोषी को दी गई सजा-ए-मौत का भी उदाहरण दिया। रवि कुमार दिवाकर पिछले 90 दिनों में 11 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं।