जीवित महिला सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित:मुजफ्फरनगर में दो महीने से राशन नहीं मिला

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में सरकारी रिकॉर्ड की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक जीवित महिला को मृत घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उसे पिछले दो महीने से राशन नहीं मिल रहा है। अब महिला को अपने आधार कार्ड में खुद को ‘जीवित’ साबित करने की शर्त रखी गई है।

यह मामला सदर तहसील क्षेत्र के मल्लूपुरा मोहल्ले की निवासी सायमा से जुड़ा है। सायमा का राशन कार्ड बना हुआ था और वह नियमित रूप से राशन प्राप्त कर रही थी। हालांकि, 9 फरवरी 2026 को अचानक उसका नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया। उसे बताया गया कि सरकारी रिकॉर्ड में उसकी ‘मृत्यु’ हो चुकी है, जिसके बाद कार्ड में मुखिया के रूप में उसके पति का नाम दर्ज कर दिया गया।

आधार कार्ड में खुद को ‘जीवित’ दर्ज कराना होगा

राशन मिलना बंद होने पर सायमा अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट स्थित जिला पूर्ति कार्यालय पहुंची। वहां उसे बताया गया कि शासन से प्राप्त डेटा में उसे मृत दर्शाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उसकी यूनिट काट दी गई है।

इसके बाद पीड़िता ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में संपर्क किया और अधिकारियों को अपनी जीवित होने की जानकारी देते हुए पूरा मामला समझाया। महिला की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने पूर्ति विभाग को तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

हालांकि, इस प्रक्रिया में सायमा के सामने एक नई चुनौती आ गई। पूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया कि राशन कार्ड दोबारा बनवाने और राशन प्राप्त करने के लिए सायमा को पहले अपने आधार कार्ड में खुद को ‘जीवित’ दर्ज कराना होगा।

सायमा का कहना है कि वह बेहद गरीब है और पिछले दो महीनों से राशन न मिलने के कारण उसे अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यह घटना सरकारी डेटा प्रबंधन में खामियों और आम जनता पर इसके गंभीर प्रभावों को उजागर करती है।