मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर नगरी आतंकवादियों की समय समय पर शरणस्थली बनी है। भले ही उन्होंने यहां कोई वारदात न की हो,लेकिन ठहरने का महफूज ठिकाना बनता रहा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर समेत आसपास के जनपदों को लेकर हमेश खुफिया विभाग अलर्ट रहता है। दल्लिी में बम वस्फिोट होने के बाद खुफिया विभाग पूर्व में पकड़े गये आतंकवादियों व उनके शरणदाताओं की कुंडली खंगालने में लगा हुआ है। वेस्ट यूपी का मुजफ्फरनगर जनपद आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना रहा है। 10 साल पूराना इतिहास खंगाला जाये तो पड़ौसी जनपद शामली और यहां कई बार आतंकी संगठनों के एजेंट पकड़े जा चुके है। जनपद पुलिस भले ही इनकी शरणस्थली ढंूढने में नाकामयाब रही हो, लेकिन देश विरोधी गतिविधियों के संचालन में उनकी धरपकड़ खुफिया विभाग द्वारा की गयी है।
कैराना के इकबाल काना का कोई सुराग आज तक पुलिस ने नहीं जुटा पायी है। उसकी उपस्थिति पुलिस के कागजों में जरुर रही है। दंगे के बाद चरथावल के दंगा पीड़ितों के लिए लगाये एक कैम्प में आतंकी संगठन के एजेंट रात गुजार चुके है। उन्होंने दंगा पीड़ितों को देश विरोधी कामों के लिए उकसाया था। दल्लिी में बम वस्फिोट के बाद एक बार सुरक्षा एजेसियों की निकाह मुजफ्फरनगर पर आकर रुक गयी है। सूत्रों का कहना कि एटीएस ने जनपद में पहुंचकर कुछ स्थानों पर छापेमारी की है। जनपद से पकडे गए आतंकियों पर एक नजर केस नम्बर: 1 वर्ष 1994 में थाना सिविल लाइन के मौहल्ला महमूदनगर में रह रहे आतंकी संगठन जेश ए मौहम्मद का एजेंट अब्दुल जब्बार पकड़ा गया था। यह आतंकवादियों को परीक्षण दिलवाने का काम करता था।
केस नम्बर :2 वर्ष 1996 में खालापार में रह रहे लश्कर ए तैय्यबा के एजेंट जाकारिया को पकड़ा था। यह पाकस्तिान का रहने वाले है और दल्लिी पुलिस ने गिरफ्तार कर इसे जम्मू कश्मीर पुलिस के सुपुर्द किया था। इसको शरण देने में योगेन्द्रपुरी निवासी इजहार, सुजडू निवासी अथर, चत्तिौडा निवासी जानमौहम्मद व खालापार निवासी इनाम इलाही को भी गिरफ्तार किया था।
केस नम्बर: 3 वर्ष 2002 में शहर कोतवाली के गांव शेरपुर से अब्दुल गफ्फार, गय्यूर व शकीला तथा दौराला निवासी अब्दुल हक की गिरफ्तारी हुई थी। खुफिया विभाग का कहना है कि इनके कब्जे से सेना के गुप्त दस्तावेज बरामद हुए थे। ये सब लोग आतंकी संगठन जेश ए मौहम्मद के लिए काम करते थे।
केस नम्बर: 4 अम्बाला की जीआरपी ने वर्ष 2003 में मीरांपुर के मौहम्मद उमर को गिरफ्तार किया था। इसके पास अम्बाला केंट के नक्शे बरामद हुए थे। यह भी जेश ए मौहम्मद संगठन से जुडा था।
केस नम्बर: 5 मोदीनगर पुलिस ने मीराुप्पुर के इलियास सैफी तथा कांधला पुलिस ने बुढाना के इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया था। इनके पास से जरूरी दस्तावेज मिले थे।
केस नम्बर: 6 वर्ष 2014 में खतौली पुलिस व एटीएस ने आतंकी सलीम पतला को गिरफ्तार किया था। यह काफी समय से मुरादाबार में छिपकर मोबाइल की दुकान चलाता था। इसके संबंध में कश्मीर के अलगांव वादी संगठन से थे। फिलहाल यह जेल में है।
केस नम्बर:7 10 जुलाई 2017 को जम्मू पुलिस ने आतंकी सदीप कुमार शर्मा निवासी अंकित विहार मुजफ्फरनगर को कश्मीर क े अंनतनाग से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आंतकी लश्कर ए तैय्यबा के लिए काम करता था। अनंतनाग में उसने अपने साथियों के साथ बम वस्फिोट किया था। गिरफ्तार आरोपी ने धर्मपरिवर्तन कर अंनतनाग में ही मुस्लिम महिला से शादी कर ली थी।
केस नम्बर:8 6 अगस्त 2017 को एटीएस ने चरथावल थाना क्षेत्र के कुटसेरा में स्थित हुसैनिया मस्जिद से आंतकी इमाम अब्दुल्लाह उल मामेन को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार आतंकी से फर्जी पासपोर्ट व आधार कार्ड मिला था। गिरफ्तार आरोपी बाग्लादेश का रहने वाला था, जो बाग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन के लिए काम करता था। इन्सेट नौ सालों में 24 बांग्लादेशी गिरफ्तार जनपद में बाग्लादेशी भी अवैध रूप से शरण लिये हुए थे। कुछ बांग्लादेशियों ने गुपचुप तरीके से राशन कार्ड व पहचान पत्र भी बनवा लिये है। आंकडों को देखे तो वर्ष 2008 से अब तक 24 बांग्लादेशी गिरफ्तार किये जा चुके है। सभी बिना पासपोर्ट वीजा के जनपद में रह रहे थे। वर्ष 2011 में पांच बांग्लादेशियों ने सुजडू गांव में डकैती की घटना को भी अंजाम दिया था।