मुजफ्फरनगर। जानकीदास निवासी वर्षा बाथरूम में अचेत पड़ी मिलीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस गीजर लगवाना है तो सिलिंडर बाथरूम के बाहर होना चाहिए। नहीं तो कॉर्बन मोना ऑक्साइड गैस जान ले सकती है।
नगर के बाग जानकीदास निवासी व्यापारी गौरव बंसल की पत्नी वर्षा (37) की गैस गीजर लगे बाथरूम में नहाते समय दम घुटने से मौत हो गई। दरवाजा तोड़ने पर महिला अचेत अवस्था में पड़ी मिली। डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया।
शहर के बाग जानकी दास निवासी लोहिया बाजार में हौजरी का काम करने वाले गौरव की पत्नी वर्षा सुबह नहाने के लिए बाथरूम में गई थी। बाथरूम में गैस गीजर लगा था। वह काफी देर तक बाहर नहीं आई। तब कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया। वहां महिला अचेत अवस्था में पड़ी मिली।
इसके बाद महिला को डॉक्टर के यहां ले जाया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने जानकारी होने से इन्कार किया है।
कॉर्बन मोना ऑक्साइड गैस बनती है जानलेवा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉक्टर योगेंद्र तिरखा ने बताया कि गैस गीजर से हादसे मुख्य रूप से कार्बन मोनो ऑक्साइड नामक जहरीली गैस के कारण होते हैं। पहले स्टोव या अंगीठी पर पानी गर्म किया जाता था। अब गीजर से पानी गर्म किया जाता है। असावधानी बरतने पर गैस गीजर जानलेवा साबित हो सकता है।
कई बार अपर्याप्त वेंटिलेशन न होने के कारण बंद बाथरूम में बिना रंग व बिना गंध वाली मोनो ऑक्साइड गैस जमा हो जाती है। इससे सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं बनती है। लंबा समय होने पर यह मौत का कारण बन सकती है। एलपीजी सिलेंडर को बाथरूम में नहीं रखना चाहिए।