मुजफ्फरनगर में भाजपा मंडल अध्यक्ष के भाई के “फर्जी एनकाउंटर” में कोई कार्रवाई नहीं

No action taken in the "fake encounter" of BJP Mandal president's brother in Muzaffarnagar
No action taken in the "fake encounter" of BJP Mandal president's brother in Muzaffarnagar

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस की भूमिका पर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष मोनू ठाकुर ने आरोप लगाया था कि उनके चचेरे भाई को बुढ़ाना क्षेत्र के ग्राम कुरथल से पुलिस ने सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में हिरासत में लिया और कुछ ही देर बाद परासौली में फर्जी मुठभेड़ दिखाते हुए गोली मार दी।

घटना के विरोध में 27 अगस्त को डाक बंगले पर राजपूत समाज और बीजेपी नेताओं की पंचायत आयोजित की गई, जिसमें भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजू अहलावत, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष रामनाथ ठाकुर, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र त्यागी समेत बीजेपी और राजपूत समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे। पंचायत में पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर 307 के तहत मुकदमा दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

राजू अहलावत ने तो अपनी ही सरकार में बीजेपी नेताओं के अपमान के कई किस्से सुनाते हुए कहा था कि अगर इस मामले में भी कार्यवाही नहीं हुई तो गांव में घुस नहीं पाओगे । उन्होंने बताया था कि पूर्व मंत्री डॉक्टर संजीव बालियान और जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी समेत पार्टी के बड़े नेता इस मामले में अफसरों से बात कर रहे है ।

विवाद बढ़ने पर पूर्व विधायक उमेश मलिक, एसपी देहात आदित्य बंसल और सीओ बुढ़ाना गजेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे थे । पूर्व विधायक ने घोषणा की थी कि एसपी नगर सत्यनारायण प्रजापत के नेतृत्व में दो सीओ की जांच समिति गठित होगी जो तीन दिन में जांच कर के अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर देगी और यदि मुठभेड़ फर्जी साबित होती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

इस बीच, एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने आज जिले में चार थाना प्रभारियों का तबादला कर दिया, जिसमें बुढ़ाना थाना प्रभारी आनंद देव मिश्रा को मंसूरपुर का प्रभारी बनाकर भेजा गया। इस बदलाव पर भाजपा नेताओं ने नाराजगी और निराशा जताई और कहा कि यह कोई सजा नहीं, बल्कि औपचारिक कार्रवाई है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं—तितावी थाना प्रभारी पर मुठभेड़ न दिखाने के नाम पर पाँच लाख की वसूली का आरोप लगा था, लेकिन उसे केवल तितावी थाने से हटाकर भोरा कला भेज दिया गया था ।

इसी तरह, किसान मोर्चा के क्षेत्रीय मंत्री अमित राठी का नाम भी पुलिस ने हथियार तस्करी मामलों में जोड़ा था, जिसके बाद पंचायत हुई और पुलिस बैकफुट पर आ गई। अपना नाम पुलिस की लिखापढ़ी में आने के बाद अमित राठी ने बाकायदा भोकरहेड़ी में पंचायत करके पुलिस पर निर्दोष युवाओं को घर से उठाकर जेल भेज देने के आरोप लगाते हुए पंद्रह अगस्त को भोपा थाने के घेराव की घोषणा भी की थी ।उस समय सीओ रवि शंकर पांडे खुद पंचायत में मौजूद थे उसके बादजूद एसएसपी संजय वर्मा ने यह कहकर कि अमित राठी के खिलाफ कोई जांच चल रही है, यह उनके संज्ञान में ही नहीं है,पूरे मामले से ही अपना पल्ला झाड़ लिया था ।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनके पास ऐसे कई वीडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, जिनमें पुलिस युवकों को घर से उठाकर जंगल में फर्जी मुठभेड़ दिखाती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही ये साक्ष्य मीडिया को सौंपे जाएंगे। इस संबंध में पूर्व विधायक उमेश मलिक से संपर्क किया गया तो पता चला कि वे पारिवारिक कारणों से अमेरिका गए हुए है ।

उमेश मलिक ने तीन दिन में जांच पूरी करने की सार्वजनिक घोषणा की थी लेकिन आज एसपी देहात आदित्य बंसल ने बताया कि अभी कोई औपचारिक जांच शुरू ही नहीं हुई है । एसपी सिटी से भी इस संबंध में संपर्क नहीं हो पाया ।

जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रामनाथ ठाकुर ने कार्यवाही पर निराशा जताई है जबकि मंडल अध्यक्ष मोनू ठाकुर का कहना है कि वे इस कार्यवाही से निराश है और कल अपने परिवार और समर्थकों से विचार करके आगे कोई निर्णय लेंगे। राजू अहलावत ने भी फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वे इस मामले को आगे लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ में शामिल सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए ।

बहरहाल इस पूरे मामले ने योगी सरकार के कानून के राज और सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। यदि भाजपा पदाधिकारियों के परिवारजन तक सुरक्षित नहीं हैं, उनके मामलों में जांच तक नहीं हो रही है तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी—यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।