ज्ञानवापी केस के चर्चित जज रवि दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में संभाला कार्यभार

मुजफ्फरनगर। वाराणसी ज्ञानवापी प्रकरण में फैसला सुनाने के बाद चर्चा में आए अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने शनिवार को मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन में अपना कार्यभार संभाल लिया। सुरक्षा की दृष्टि से उनका तबादला चित्रकूट से मुजफ्फरनगर किया गया है। हैरत है कि चित्रकूट से निकलने से पहले ही मेरठ के एडीजी को सुरक्षा मुहैया कराने संबंधी पत्र लिखने के बाद भी उन्हें शनिवार को मुजफ्फरनगर में सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई।

बता दें कि अपर जिला जज रवि कुमार ज्ञानवापी के अलावा बरेली शहर में हुए उपद्रव के मामले में तौकीर रजा को सजा सुनाने और गैंगस्टर एवं मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम (एनडीपीएस) की विशेष अदालत के रूप में कार्य करते हुए कई अहम फैसले दिए हैं। ज्ञानवापी मामले पर फैसला देने के बाद उनके पास कई धमकी भरे पत्र आए। इसकी जानकारी उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी दी थी।

उस दौरान लखनऊ की विशेष अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा गया था। आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों ने भी उन्हें सोशल मीडिया पर काफिर बताते हुए हत्या की धमकी दी थी। इसी क्रम में सुरक्षा की दृष्टि से उनका तबादला मुजफ्फरनगर कर दिया गया है। पता चला है कि अपर जिला जज ने 25 नवंबर को ही मेरठ के एडीजी और एसएसपी को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी देते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की थी।

हत्या का षड्यंत्र रचने का हुआ था खुलासा
बता दें कि आतंकवादी विरोध दस्ता एटीएस के गोमतीनगर थाना लखनऊ में दरोगा प्रभाकर ओझा की तरफ से भोपाल के अदनान खान के विरुद्ध जज को धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचना में यह तथ्य सामने आया था कि अदनान न्यायाधीश की हत्या करने का षडयंत्र रचा जा रहा है। इतना ही नहीं शाहजहांपुर में तैनात भाई जज दिनेश कुमार दिवाकर के परिवार की भी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा का कहना है कि अभी तक अपर जिला जज को सुरक्षा मुहैया कराने संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है। फिर भी इसकी जानकारी जुटाकर जल्द से जल्द सुरक्षा मुहैया करा दी जाएगी।