पत्नी थी प्रेग्नेंट, पति बार-बार कर रहा था डिमांड, बोली- मैं नहीं… फिर किया कांड, अब कोर्ट ने…

Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने एक दिल दहला देने वाले मामले में 30 वर्षीय कपड़ा व्यापारी को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. उसने अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी की 2020 में हत्या कर दी थी और झूठा दावा किया था कि उसकी मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हुई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला जून 2020 का है, जब कोविड महामारी पूरे देश में फैली हुई थी. उसी दौरान आरोपी ए.एस. मोहम्मद ने अपनी 25 वर्षीय पत्नी तबस्सुम की हत्या कर दी. इसके बाद उसने परिवार वालों को गुमराह किया और कहा कि उसकी पत्नी की मौत कोरोना से हुई है. उसने तबस्सुम को बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफना दिया.

परिवार की शिकायत और खुलासा

तबस्सुम के मामा मुर्तजा अहमद को उसकी मौत पर संदेह हुआ. उन्होंने बताया कि जब वह अपनी भांजी के ससुराल शिकारपुर गांव (थाना भोरकलां क्षेत्र) पहुंचे, तो उन्होंने उसे बिस्तर पर मृत पाया. शरीर पर चोट के निशान थे, लेकिन ससुरालवालों ने कहा कि वह कोविड से मरी है और जल्दबाजी में उसे दफना दिया गया. तीन दिन बाद मुर्तजा अहमद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि तबस्सुम की हत्या दहेज के लिए की गई है.

शादी और दहेज की मांग
शिकायत में बताया गया कि तबस्सुम की शादी मोहम्मद से लगभग 5 साल पहले हुई थी. शादी के समय दहेज भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसका पति और परिवार वाले लगातार अतिरिक्त 2 लाख रुपये की मांग कर रहे थे. इस वजह से तबस्सुम को नियमित रूप से प्रताड़ित किया जाता था.

पोस्टमार्टम और केस दर्ज
शिकायत के बाद पुलिस ने तबस्सुम का शव कब्र से निकलवाया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि उसकी मौत गला दबाकर (Strangulation) की गई थी. इसके बाद पुलिस ने पति ए.एस. मोहम्मद, उसकी मां शमीम (55 वर्ष), भाई मोहम्मद इंसाफ (28 वर्ष) और चाची शबरिन (50 वर्ष) के खिलाफ केस दर्ज किया.
किन धाराओं में मामला चला
पुलिस ने जांच के बाद इन पर गंभीर धाराओं में आरोप तय किए, जिनमें शामिल हैं:
IPC धारा 498-ए (महिला को प्रताड़ित करना)
IPC धारा 304-बी (दहेज मृत्यु)
IPC धारा 323 (मारपीट)
IPC धारा 201 (सबूत मिटाना)
IPC धारा 316 (गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत कराना)
दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4
पुलिस ने सभी सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है.

अदालत का फैसला
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश निशांत सिंगला की अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए पति ए.एस. मोहम्मद को दोषी ठहराया. अदालत ने उसे 10 साल की कठोर कैद और 56,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. हालांकि, ट्रायल के दौरान आरोपी की चाची शबरिन की मौत हो गई. वहीं उसकी मां और भाई को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया.