41 साल बाद कनाडा को आया होश, पहली बार कबूला सच

एयर इंडिया फ्लाइट 182 में हुए बम ब्लास्ट (कनिष्क विस्फोट) को लेकर 41 साल बाद आखिरकार कनाडा ने उस सच को स्वीकार कर लिया, जिसे भारत चार दशकों से कहता आ रहा है. 23 जून 1985 को एयर इंडिया फ्लाइट 182 मॉन्ट्रियल-लंदन-नई दिल्ली मार्ग पर उड़ान भर रही थी, जब आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में लगभग 9,400 मीटर की ऊंचाई पर बम विस्फोट के कारण विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया. इस हादसे में कुल 329 लोगों की मौत हुई थी.

41 साल बाद कनाडा ने कबूला सच

इस ब्लास्ट के बाद कनाडा 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस के रूप में मनाता आया है. कनाडा के कई शहरों, वैंकूवर, टोरंटो, मॉन्ट्रियल और ओटावा में स्थायी स्मारक स्थापित हैं. हालांकि कनाडा ने कभी भी ये स्वीकार नहीं किया था कि खालिस्तानी अंतकियों ने इस विमान में बम रखा था. अब 41 साल बाद कनाडाई सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने इस बम ब्लास्ट में खालिस्तानी आतंकवादियों की संलिप्तता को स्वीकार किया है.

कनाडा की खुफिया एजेंसी ने कनिष्क बम ब्लास्ट को आतंकवाद का एक जघन्य कृत्य बताते हुए विमान में एक्सप्लोसिव डिवाइस लगाने के लिए कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकवादियों को दोषी ठहराया. CSIS ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा, ‘आतंकवाद पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर CSIS एअर इंडिया की फ्लाइट 182 में सवार उन 329 लोगों को याद करता है, जिन्होंने जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई.’

खालिस्तानी चरमपंथियों ने प्लांट किया था बम: कनाडा

कनाडाई सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने कहा, ’23 जून, 1985 को कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों की ओर से लगाए गए बम से उस विमान में ब्लास्ट हुआ, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में अधिकांश कनाडाई थे. यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा कम्युनिटी के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ. उस समय CSIS को बने एक साल से भी कम समय हुआ था. पिछले चार दशकों से हम कनाडाई लोगों को राजनीतिक, धार्मिक और विचारधारा से प्रेरित हिंसा से बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं.’

भारत ने आतंकवाद से लड़ने का संकल्प दोहराया

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एअर इंडिया 182 ‘कनिष्क’ बम विस्फोट में जान गंवाने वाले लोगों को इस घटना की 41वीं बरसी पर मंगलवार (23 जून 2026) को श्रद्धांजलि दी और कहा कि भारत हर तरह के आतंकवाद से निपटने के अपने संकल्प को दोहराता है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बम विस्फोट को कनाडा के इतिहास में हुआ सबसे भीषण हमला” बताते हुए कहा कि उनका देश हर तरह के हिंसक चरमपंथ के खिलाफ खड़ा है.