जंग के बीच ईरान के 4 टारगेट सेट, IRGC का प्लान कामयाब हुआ तो बर्बाद हो जाएंगे अमेरिका और इजरायल

Iran Key targets: बीते 100 घंटों से मिडिल ईस्ट में अजीब सी खामोशी छाई है. इजरायल के हमलों के बाद, ईरान के पलटवार को छोड़ दें तो अमेरिका चार दिन से खामोश है. ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, कोई नहीं जानता. इस बीच दावा किया जा रहा है कि ईरान ने ट्रंप और नेतन्याहू की फील्डिंग सेट करते हुए 4 टारगेट तय करके जंग की दशा और दिशा बदल दी है. 28 फरवरी के हमले में अपने सुप्रीम लीडर को खोने के बाद बदले की आग में जल रहा ईरान, जरूरत पड़ी तो मिडिल ईस्ट के महाविनाश की स्क्रिप्ट लिख चुका है. ऐसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्लान कामयाब हुआ तो इजरायल और अमेरिका के बर्बाद होने की नौबत आ जाएगी.

अमेरिका बैकफुट पर या वेट एंड वाच
अब दो पहलू नजर आते हैं. पहला- ट्रंप के दिमाग में क्या चल रहा है, जो आमने-सामने की जंग में पैदल सेना उतारने के नाम पर अमेरिकी सैनिकों की नई-नई यूनिट ईरान सीमा तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन शांत हैं. दूसरा- ईरान ने ऐसा क्या किया कि चार दिन से अमेरिकी बॉम्बर्स उड़ान नहीं भर रहे, उसकी तोपों के मुंह खामोश हैं. सेंट्रल कमांड के जखीरे से नई मिसाइलें फायर नहीं हो रहीं और विध्वंसक युद्धपोतों में भी कुछ खास हलचल नहीं है. हां, ईरान हमला न कर सके इसके लिए अमेरिकी इंटरसेप्टर जरूर रेडी हैं.

ईरान का एक तीर और चार टारगेट
पश्चिमी देशों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने मिडिल ईस्ट की जंग में एक तीर से चार निशाने साधते हुए पूरे संघर्ष को ‘एनर्जी वॉर’ में बदल दिया है. इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जो चार टारगेट सेट किए हैं. उनमें एक साथ अमेरिका और इजरायल को धता बताने और रणनीतिक रूप से तगड़ी आर्थिक चोट देने की तैयारी की गई है. ईरान, ‘मर जाएंगे या मिटा देंगे’ वाला तेवर दिखा रहा है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने के लिए पूरा आसमान है.

इसलिए उसने खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिटाने के लिए ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ वाले ख्याल को दरकिनार करते हुए यूएई, कुवैत, सऊदी, बहरीन, ओमान समेत हर जगह ऐसी तबाही मचाई की ट्रंप जंग के 29वें दिन तक होर्मुज को नहीं खुलवा पाए है.

इस तरह ईरान के एनर्जी वॉर का पहला टारगेट होर्मुज स्ट्रेट, दूसरा इजरायल के पावर और न्यूक्लियर प्लांट्स, तीसरा टारगेट अमेरिकी कंपनियों के प्रोजेक्ट (अमेजन और अन्य) और चौथा खाड़ी देशों के एनर्जी सोर्स हैं.

ट्रंप दो बार अंतिम हमला करने की धमकी देकर पलटी मार चुके हैं. इसकी वजह ईरान का ‘एनर्जी डिटरेंस’ है. ईरान अपने तेल-गैस के ठिकानों पर हमला होने पर बराबर का जवाब देने की रणनीति अपना चुका है. ईरान के पावर प्लांट ठप करने की ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान की सेना के रुख में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है. मतलब साफ है अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया, तो मिडिल ईस्ट में किसी का भी तेल और गैस का कुआं सुरक्षित नहीं बचेगा.