नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली से मचे हड़कंप के बीच केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है. सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कुछ विशेष श्रेणियों की सिक्योरिटीज (प्रतिभूतियों) में निवेश करने वाले विदेशी दिग्गजों के लिए टैक्स के नियमों को आसान बनाने वाले एक अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी दे दी है. माना जा रहा है इससे विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजारों की तरफ दौड़े चले आएंगे. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की ओर से लाया गया था, हालांकि इसके विस्तृत विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं हो सके.
इसे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसका सीधा उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स के जटिल जंजाल को कम करना है ताकि वे अपनी पूंजी भारत से बाहर ले जाने के बजाय यहीं निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों. एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाली इस प्रस्तावित टैक्स राहत से न सिर्फ घरेलू शेयर बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ेगी, बल्कि रुपये पर बना भारी दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा.
रिजर्व बैंक भी कर सकता है महत्वपूर्ण घोषणा
सरकार का यह अध्यादेश भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बनाई गई एक संयुक्त और समन्वित रणनीति का हिस्सा है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है. शुक्रवार को एमपीसी के फैसलों की घोषणा होगी. ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस अध्यादेश को सपोर्ट करने वाले कुछ और बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय बदलावों का ऐलान भी कर सकता है.
अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की तैयारी
विदेशी निवेशकों को लुभाने और रुपये को मजबूत करने के साथ ही सरकार विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य नीतिगत कदमों पर भी काम कर रही है. विभिन्न उद्योगों और कारोबारों को मंदी से बचाने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट लाइन दी जा सकती है. वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण संकट से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए विशेष राहत पैकेज लाया जा रहा है.