तेलंगाना में जन्म, छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक आतंक, 7 राज्यों में तलाश… कौन था 1.1 करोड़ का इनामी माओवादी गणेश उईके?

Naxali Ganesh Uike Profile: सुरक्षाबलों को नक्सलमुक्त अभियान में एक और बड़ी सफलता हाथ में मिली है. जहां छत्तीसगढ़ से लगे हुए ओडिशा के कंधमाल में हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली गणेश उईके को भी ढेर कर दिया है, यह बड़ी सफलता मानी जा रही है. क्योंकि गणेश उईके की तलाश सात राज्यों में चल रही थी, उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम भी रखा हुआ था. वह लंबे समय तक छत्तीसगढ़ में भी रह चुका है. हाल फिलहाल में उसे नक्सल संगठन में ओडिशा की जिम्मेदारी दी गई थी, ऐसे में वह ओडिशा में ही नक्सली संगठन चला रहा था. तेलंगाना में जन्मा गणेश उईके नक्सली संगठन का बड़ा चेहरा बन चुका था, जिसका आतंक छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक तक फैला हुआ था.

गणेश उईके पर था बड़ा इनाम
गणेश उईके का जन्म तेलंगाना के नालगोंडा जिले में आने वाले पुल्लेमला गांव में हुआ था. जवानी में ही उसने नक्सली संगठन में ज्वाइन कर लिया था. देखते ही देखते वह तेजी से नक्सल संगठन में एक्टिव हो जाता है. धीरे-धीरे वह छत्तीसगढ़ में एक्टिव हो गया और सेंट्रल कमेटी का सदस्य बन गया था. पिछले कुछ समय से उसे ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव बनाया गया था, जिसके बाद से वह नक्सली संगठन में एक्टिव था. ओडिशा में वह कई घटनाओं को अंजाम दे चुका था, इसे अलावा वह ओडिशा में ही नक्सली संगठन को संचालित करवा रहा था.

झीरम घाटी में भी था मास्टरमाइंट
छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में जो नक्सली घटना हुई थी, उसमें भी गणेश ऊइके की भूमिका अहम मानी जाती है. 2013 की इस घटना में सुकमा जिले में नक्सलियों ने कई कांग्रेसी नेताओं को मारा था, जिसमें गणेश ऊइके भी शामिल था, यह नक्सली इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में शामिल था. वह माओवादी आंदोलन और नक्सलियों की रणनीति का रीढ़ माना जाता था, उसी की वजह से रसद और संचार चैनलों की जिम्मेदारी भी थी. ऐसे में उसका जाना नक्सलियों के लिए बड़ा झटका है. क्योंकि गणेश ऊइके के जाने से नक्सलियों की सप्लाई चैनन भी बहुत हद तक टूटेगी.

गणेश ऊईके के थे कई नाम
खास बात यह है कि गणेश ऊईके के कई नाम थे, उसे नक्सली संगठन में राजेश तिवारी, चमरू, हनुमंत और रूपा के नाम से भी जाना जाता था, वह कई गुरेल्ला में माहिर माना जाता था. यही वजह थी कि वह छत्तीसगढ़ के अलावा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा तक में एक्टिव माना जाता था, जवानी में वह कई राज्यों में लगातार नक्सली संगठन का विस्तार कर रहा था. हालांकि लंबे समय से वह ओडिशा में ही था. खास बात यह है कि जब नक्सलियों के खिलाफ बस्तर में कार्रवाई तेज होती थी, तो अक्सर नक्सली ओडिशा की तरफ मूव कर जाते थे, जिसमें गणेश बड़ी भूमिका निभाता था. यही वजह थी कि उसकी तलाश लंबे समय से सात राज्यों में चल रही थी.

ओडिशा में भी फोर्स एक्टिव
खास बात यह है कि अब छत्तीसगढ़ के सभी पड़ोसी राज्यों में भी फोर्स एक्टिव हो चुकी है, क्योंकि जहां-जहां नक्सलियों का विस्तार था वह एक्शन किया जा रहा है. ओडिशा में भी नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई शुरू हो गई है, ऐसे में नक्सलियों के खात्में की जो डेटलाइन तय की गई है, वह पूरी होती नजर आ रही है.