Vinesh Chandel I-PAC Arrested: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चुनाव रणनीतिकार संस्था I-PAC के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई करोड़ों रुपये के ‘कोयला घोटाले’ से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है। I-PAC वही संस्था है जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC के चुनावी अभियानों का प्रबंधन करती है।
आरोप है कि कोयला तस्करी का काला धन हवाला के जरिए इस कंपनी के खातों तक पहुंचा। चुनाव से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि विनेश चंदेल बंगाल चुनाव अभियान के बेहद अहम रणनीतिकार माने जाते हैं।
कौन हैं विनेश चंदेल?
विनेश चंदेल I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस मशहूर चुनावी मैनेजमेंट फर्म को खड़ा किया था। चंदेल मुख्य रूप से कंपनी के ऑपरेशंस और वित्तीय रणनीति देखते हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव प्रचार और जमीनी रणनीति को तैयार करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। वह पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के लिए चुनावी बिसात बिछाने वाले प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
क्यों हुए गिरफ्तार?
ED ने विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि बंगाल के आसनसोल क्षेत्र में हुए बहुचर्चित कोयला घोटाले का पैसा अवैध तरीके से I-PAC की कंपनी तक पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक, कोयला चोरी और तस्करी से जुटाया गया करोड़ों रुपया गलत रास्तों से घूमकर चुनावी मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल किया गया। इसी ‘मनी ट्रेल’ (पैसों के लेनदेन) के ठोस सबूत मिलने के बाद चंदेल पर यह कार्रवाई की गई है।
हवाला और ‘अंगड़िया’ कनेक्शन
ED की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लगभग 20 करोड़ रुपये का काला धन हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचा। यह पैसा मुंबई की एक ‘अंगड़िया’ फर्म के माध्यम से ट्रांसफर किया गया था। खास बात यह है कि यह वही फर्म है जिसका नाम दिल्ली के शराब घोटाले की जांच में भी सामने आया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला तस्करों ने इस नेटवर्क का इस्तेमाल करके अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश की और उसे कंपनी के खातों में डाला।
ममता बनर्जी से क्या है संबंध?
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब इसी साल जनवरी में कोलकाता स्थित I-PAC दफ्तर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं। आरोप लगा था कि मुख्यमंत्री वहां से कुछ महत्वपूर्ण फाइलें अपने साथ ले गई थीं, जिससे जांच में बाधा आई। विनेश चंदेल चूंकि ममता बनर्जी के चुनावी अभियान की कमान संभाल रहे थे, इसलिए उनकी गिरफ्तारी सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की चुनावी तैयारियों और उनकी पार्टी की छवि पर बड़ा असर डाल सकती है।
ED की अब तक की कार्रवाई
विनेश चंदेल की गिरफ्तारी से पहले ED ने देश के कई शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में I-PAC के अन्य निदेशकों और सहयोगियों के ठिकानों पर तलाशी ली गई। यह पूरा मामला साल 2020 में CBI द्वारा दर्ज की गई उस FIR पर आधारित है, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयला चोरी का आरोप लगाया गया था। अब इस जांच की आंच चुनावी रणनीतिकारों तक पहुंच चुकी है।