यूरोप में बैन लेकिन भारत में धड़ल्ले से बिक रहे ‘खतरनाक’ कीटनाशक, कैंसर का बढ़ रहा है खतरा!

भारत में खेती में इस्तेमाल होने वाले कई ऐसे कीटनाशक और खरपतवार नाशक (हर्बिसाइड) आज भी खुलेआम उपयोग किए जा रहे हैं, जिन्हें दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर के चलते प्रतिबंधित किया जा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन खेतों से होते हुए सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रहे हैं, जिससे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मई 2024 से मई 2026 के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने भारत से भेजे गए 365 कृषि उत्पादों को कीटनाशकों और भारी धातुओं (Heavy Metals) के अत्यधिक अवशेष मिलने के कारण खारिज कर दिया। इसके बाद भारत में खाद्य सुरक्षा और कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है।

भारत में अब भी इस्तेमाल हो रहे विवादित रसायन
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में कई ऐसे रसायनों का उपयोग जारी है, जिन पर कई देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
पैराक्वाट (Paraquat): 70 से अधिक देशों में बैन, लेकिन भारत में अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। यह शरीर के लिए बेहद जहरीला माना जाता है और फेफड़ों, किडनी तथा तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्लाइफोसेट (Glyphosate): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर एजेंसी IARC ने इसे “संभावित कैंसरकारी” (Probable Carcinogen) बताया है। इसके बावजूद भारत में इसका उपयोग जारी है।
2,4-D: यह वही रसायन है, जो वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए एजेंट ऑरेंज (Agent Orange) का प्रमुख घटक था। WHO की एजेंसी इसे “संभवतः कैंसरकारी” (Possibly Carcinogenic) मानती है।
डाइमेथोएट (Dimethoate): डीएनए को नुकसान पहुंचाने की आशंका के कारण 31 देशों में प्रतिबंधित है, लेकिन भारत में उपलब्ध है।
ऐसिफेट (Acephate): इस कीटनाशक को मधुमक्खियों की घटती संख्या से जोड़कर देखा जाता है।

स्वास्थ्य पर बढ़ रही चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन ऐसे रसायनों के संपर्क को जितना संभव हो कम किया जाना चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में वर्ष 2022 में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए थे। केंद्र सरकार का अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15.7 लाख तक पहुंच सकती है।

सरकार से उठ रहे सवाल
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जब कई देशों ने इन रसायनों पर प्रतिबंध लगा दिया है, तो भारत में इनके इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी जा रही है। उनका मानना है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू करने और सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की सेहत भी सुरक्षित रह सके।