दिल्ली बम धमाके के मामले में गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। अब कानपुर से गिरफ्तार कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर आरिफ का कनेक्शन मारे गए आतंकी डॉक्टर उमर से सामने आया है। जांच में पता चला है कि दोनों ने साथ में MBBS की पढ़ाई की थी। दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस संबंध की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता चल सके कि डॉक्टर आरिफ और उमर के बीच संबंध कितने पुराने थे और क्या वे किसी आतंकी नेटवर्क का हिस्सा थे।
सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर आरिफ को दिल्ली बम धमाके के बाद कानपुर के कार्डियोलॉजी विभाग से हिरासत में लिया गया था। उनकी गिरफ्तारी आतंकी डॉक्टर उमर की मौत के बाद हुई पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर हुई। जांच एजेंसियों को शक है कि आरिफ किसी ऐसे नेटवर्क से जुड़ा है जो मेडिकल पेशे के आड़ में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
‘डॉ. आरिफ की दिनचर्या सीमित और संदेहास्पद थी’
आरिफ अशोकनगर स्थित फातिमा स्कूल के बगल में एक अपार्टमेंट में किराये पर रहते थे। मकान मालिक कन्हैयालाल, जो भट्ठा संचालक हैं, ने बताया कि उनके मकान में छह फ्लैट हैं, जिनमें से चार किराये पर हैं। करीब तीन महीने पहले कार्डियोलॉजी के डॉक्टर अभिषेक ने एक फ्लैट किराये पर लिया था। एक महीने पहले वही डॉक्टर आरिफ को साथ लेकर आए और बताया कि वे अब साथ रहेंगे।
मकान मालिक के अनुसार, डॉक्टर आरिफ बहुत कम बोलते थे और किसी से बातचीत नहीं करते थे। वे सुबह लगभग 10 बजे ओला बाइक से निकलते और शाम को लौटकर सीधे कमरे में चले जाते। उनकी दिनचर्या अत्यंत सीमित और संदेहास्पद मानी जा रही है।
NIA और ATS की टीमें सक्रिय
इस बीच, NIA और ATS की टीमें कानपुर में सक्रिय हैं। दोनों एजेंसियां शहर में कश्मीरी मूल के छात्रों और प्रोफेशनल्स की जानकारी जुटा रही हैं। एचबीटीयू में ऐसे 48 छात्रों की सूचना मिली है जिनकी प्रोफाइल जांच के दायरे में है। इसके साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है कि डॉक्टर आरिफ का संपर्क लंबे समय से डॉक्टर शाहीन से था। जांच में यह भी सामने आया है कि शाहीन और आरिफ के बीच संवाद नियमित था और दोनों कई संदिग्ध लोगों के संपर्क में थे।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2006 से 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान डॉक्टर शाहीन ने नई सड़क, पेंचबाज, यतीमखाना, दादा मियां, बेकनगंज और चमनगंज जैसे क्षेत्रों में एक नेटवर्क खड़ा किया था। माना जा रहा है कि डॉक्टर आरिफ इसी नेटवर्क के संपर्क में आया था।
फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसियां इस कड़ी की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि डॉक्टर आरिफ ने आतंकी डॉक्टर उमर के साथ सिर्फ पढ़ाई ही नहीं की, बल्कि आगे चलकर कुछ आपराधिक संपर्क भी बनाए।
NIA और ATS दोनों की टीमें आरिफ से पूछताछ कर रही हैं और उसके डिजिटल उपकरणों की भी जांच की जा रही है। यह गिरफ्तारी दिल्ली बम धमाके से जुड़े नेटवर्क के कई छिपे चेहरों को उजागर करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।