ऐसे कैसे होगी Peace Deal? ट्रंप करना चाह रहे समझौता, उधर इजरायल ने फिर लेबनान पर बरसाए बम

Donald Trump: मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने की अमेरिकी कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार शांति-शांति का राग अलाप रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि रविवार को एक ऐतिहासिक US-ईरान समझौता हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल रुकने को तैयार नहीं है. इजरायल ने एक बार फिर दक्षिणी लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए हैं. इस नए सैन्य एक्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इस माहौल में US-ईरान के बीच शांति समझौता कैसे मुमकिन होगा?

इस पूरे कूटनीतिक ड्रामे के बीच ईरान ने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है. ईरानी मीडिया के अनुसार, शुरुआती US-ईरान समझौते की पहली और सबसे बड़ी शर्त यही है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर इजरायल को अपनी दुश्मनी और गोलाबारी तुरंत बंद करनी होगी. ईरान की इस शर्त के बावजूद इजरायल ने फिर दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह और अन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बमबारी जारी रखी. ऐसे में ट्रंप का ‘संडे डील’ का दावा खटाई में पड़ता नजर आ रहा है, क्योंकि जब तक इजरायल पीछे नहीं हटता, ईरान किसी भी दस्तावेज पर दस्तखत नहीं करेगा.

धमाकों से दहला दक्षिणी लेबनान
दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों से रह-रहकर आ रही भीषण धमाकों और तबाही की खबरें वहां की बेहद नाजुक और गंभीर सुरक्षा स्थिति को बयां कर रही हैं. White House की तमाम कूटनीतिक कोशिशों और बंद कमरों में चल रही बैठकों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल जुदा है. आसमान से बरस रहे मिसाइल और जमीनी चौकियों पर होते धमाके यह साफ दिखा रहे हैं कि इजरायल फिलहाल किसी के दबाव में आने के मूड में नहीं है.

क्या फ्लॉप हो जाएगी ट्रंप की रणनीति?
ईरानी मीडिया ने पहले ये उम्मीद जताई थी कि इस समझौते से पूरे इलाके में तनाव कम हो जाएगा और सालों से सुलग रहा मिडिल ईस्ट शांत होगा. लेकिन इजरायल के इस ताजा रुख ने ट्रंप की रणनीति पर पानी फेर दिया है. अब देखना यह होगा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप इजरायल के प्रधानमंत्री को हमले रोकने के लिए मना पाते हैं, या फिर यह ऐतिहासिक शांति समझौता होने से पहले ही पूरी तरह फ्लॉप हो जाएगा.