‘फिर हुआ हमला तो देंगे करारा जवाब’, कर्नल सोफिया कुरैशी की PAK को दोटूक, कहा- सुरक्षा पर समझौता बर्दाश्त नहीं

Colonel Sophia Qureshi Speech in Young Leaders Forum: ऑपरेशन सिंदूर में आप कर्नल सोफिया कुरैशी की भूमिका को तो नहीं भूले होंगे. वही कर्नल, जिन्होंने युद्ध क्षेत्र की घटनाओं के सटीक वर्णन से पाकिस्तान के प्रोपेगंडा की हवा निकाल दी थी. वे आज दिल्ली में आयोजित यंग लीडर्स फोरम में बतौर गेस्ट बोल रही थीं. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत इस बात से की कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ सेनाओं का ही युद्ध नहीं था बल्कि इसमें देश के युवाओं, आम नागरिकों ने अपने-अपने तरीके से योगदान दिया.

देश में 65 प्रतिशत से ज्यादा Gen Z

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है. यहां पर 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की है, जो Gen Z से संबद्ध रखती है. यह हमारे लिए केवल डेमोग्राफिक फायदा नहीं है बल्कि स्ट्रेटजिक रिजर्व भी है. ऑपरेशन में यह रिजर्व उन्होंने सीधे महसूस किया. युवाओं ने वर्दी में और नागरिक के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कर्नल सोफिया कुरैशी ने आगे कहा, ऑपरेशन सिंदूर से युद्ध में एक परिवर्तनकारी बदलाव लाया है. इससे यह साबित हुआ है कि किसी भी देश में शांति, स्थिरता और प्रगति तब तक नहीं आ सकती, जब तक कि युवाओं और आम नागरिकों की उसमें भागीदारी न हो.

दुनिया ने देखी भारत की युद्ध क्षमता

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने भारत की बहु-क्षेत्रीय सटीक युद्ध क्षमता को दुनिया को सामने साबित किया. यह सेनाओं के इंटीग्रेशन, जॉइंटनेस और आत्मनिर्भरता का भी शानदार उदाहरण रहा. कर्नल कुरैशी ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर ने एक पारंपरिक मिलिट्री स्ट्राइक से बहुत आगे जाकर आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदल दी है. इस ऑपरेशन में केवल सीमा-पर हमला नहीं हुआ बल्कि साइबर, ड्रोन, सूचना संचालन, सामाजिक-मीडिया अभियान और नागरिक जागरूकता को भी एक युद्ध-क्षेत्र के रूप में लिया गया. इसी का हिस्सा वे युवा भी रहे, जिन्होंने वर्दी और सिविलियन के रूप में अपनी भूमिका निभाई.’

‘शस्त्र और शास्त्र का मेल था सिंदूर’

कुरैशी ने इस अभियान को सेना, नौसेना, वायु-सेना तथा नागरिक एजेंसियों की संयुक्त मोर्चेबंदी का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ‘शस्त्र’ ही नहीं बल्कि ‘शास्त्र’ का भी मेल था. जिसने देश की जीत सुनिश्चित की. ऑपरेशन सिंदूर ने तीनों सेवाओं के बीच अभूतपूर्व समन्वय दर्शाया. ये सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रोक-थाम से लेकर जवाबी कार्रवाई तक की रणनीति थी. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के जरिए भारत ने यह साफ कर दिया कि अगर फिर आतंकी हमला हुआ तो हम इसके अपराधी, समर्थकों और साजिशकर्ताओं को जवाब देंगे. कर्नल कुरैशी ने युवाओं को संदेश दिया कि सुरक्षा केवल सेना-कर्मियों का ही काम नहीं है बल्कि सभी नागरिकों का दायित्व है.