ईरान में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच अब सत्ता के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की ओर से खाड़ी देशों को लेकर दिए गए बयान ने वहां के सत्ताधारी वर्ग में नई बहस छेड़ दी है. दरअसल, पेजेशकियान ने हाल ही में खाड़ी देशों पर हुए हमलों को लेकर खेद जताया था. उन्होंने माफी मांगते हुए यह भरोसा भी दिलाया कि ईरान की ओर से भविष्य में ऐसे हमले नहीं किए जाएंगे. उनका यह कदम क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया.
हालांकि, राष्ट्रपति का यह रुख ईरान के कट्टरपंथी धड़े को रास नहीं आया. कट्टरपंथी नेताओं और प्रभावशाली समूहों ने इसे कमजोरी के संकेत के रूप में लिया और खुलकर नाराजगी जताई. इसी अंदरूनी खींचतान का असर यह है कि राष्ट्रपति की ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद खाड़ी देशों को लेकर तनाव कम होता नहीं दिख रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी हमलों का सिलसिला अभी भी जारी है, जिससे साफ है कि सत्ता के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं. हालांकि ट्रंप ने इस बयान को अलग ही तरह से पेश किया. उन्होंने ईरान के इस कदम को माफी बताते हुए इसे सीधे तौर पर आत्मसमर्पण करार दिया. इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि शनिवार को बहुत कड़ा प्रहार किया जाएगा. उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो अमेरिका अपने सैन्य हमलों का दायरा और बढ़ा सकता है.
माफी मांगते हुए पड़ोसी देशों को दिया संदेश
ईरान के राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय तनाव के बीच अपने पड़ोसी देशों को संदेश देते हुए कहा कि अगर ईरान की किसी कार्रवाई से उन्हें असुविधा या नुकसान पहुंचा है तो वह व्यक्तिगत रूप से इसके लिए माफी मांगते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने पड़ोसियों के साथ टकराव नहीं चाहता और क्षेत्र में शांति बनाए रखना जरूरी है. राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से यह भी अपील की कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित अमेरिकी या इजरायली हमले का हिस्सा न बनें. उनका कहना था कि क्षेत्रीय देशों को बाहरी शक्तियों के संघर्ष में शामिल होने से बचना चाहिए और आपसी सहयोग तथा संवाद के जरिए स्थिरता बनाए रखनी चाहिए.
ईरानी राष्ट्रपति से नाराज हुए सीनियर कमांडर्स
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियान के माफी वाले बयान से ईरान की राजनीति में हलचल मच गई. बयान के बाद देश के अंदर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, जिसके चलते राष्ट्रपति कार्यालय को सफाई देते हुए कहना पड़ा कि ईरान की सेना क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों से होने वाले किसी भी हमले का जोरदार जवाब देगी. हालांकि कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपने बयान को दोबारा साझा किया, लेकिन इस बार उन्होंने अपने भाषण से माफी वाला हिस्सा हटा दिया. बताया जा रहा है कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि माफी के बयान से कट्टरपंथी धड़े, खासकर शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, नाराज हो गए थे.
डोनाल्ड ट्रंप की मांग को किया खारिज
ईरान के नेता पेजेशकियान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उनसे बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था. पेजेशकियान ने इसे सिर्फ एक सपना बताते हुए कहा कि ईरान ऐसी किसी मांग को स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की अस्थायी नेतृत्व परिषद ने पड़ोसी देशों को लेकर एक अहम फैसला लिया है. परिषद ने सहमति जताई है कि जब तक उन देशों की जमीन से ईरान पर हमले नहीं किए जाते, तब तक उनके खिलाफ किसी भी तरह के हमले को निलंबित रखा जाएगा.