मीडिल ईस्ट के कई देशों में हालात बेहद खराब हैं. सीरिया में मोहम्मद शरा के सत्ता में आने के बाद से वहां दो कम्युनिटी के बीच संघर्ष थम नहीं रहा है. वहीं, दूसरी तरफ इजरायली सेना गाजा पर महीनों से हमले कर रही है. इसी बीच, अब इजरायल को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि इजरायल की एक जगह पर तेजी से निर्माण काम चल रहा है. माना जा रहा है कि यह जगह लंबे वक्त से इजरायल के संदिग्ध परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी रही है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यहां नया ढांचा या तो एक रिएक्टर हो सकता है या फिर न्यूक्लियर वेपंस बनाने की जगह है. ये जगह नेगेव में मौजूद शिमोन पेरेस न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर (डिमोना) में है, जिसकी ताजा गतिविधियों ने एक बार फिर इस बहस को हवा दी है कि क्या इजरायल मिडिल ईस्ट का इकलौता परमाणु हथियार वाला देश है?
जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज (मिडलबरी इंस्टीट्यूट) के एक्सपर्ट्स जेफ्री लुईस ने इन तस्वीरों और डिमोना के इतिहास पर कहा, ‘ये शायद एक रिएक्टर है. यह Concluding Circumstances पर आधारित है, लेकिन ऐसे मामलों में यही तरीका होता है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह सोच पाना बहुत मुश्किल है कि यह कुछ और है.’
एक्सपर्ट्स की राय मुख्तलिफ
वहीं, तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले सात एक्सपर्ट्स ने इसपर सहमति जताई कि यह कंस्ट्रशन शायद इजरायल के लंबे वक्त से संदिग्ध परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है. क्योंकि यह डिमोना रिएक्टर के पास मौजूद है, जहां कोई सिविल प्लांट मौजूद नहीं है. हालांकि, इसके मकसद पर उनकी राय मुख्तलिफ थी. इनमें से तीन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्ट्रक्चर एक नए हेवी वाटर रिएक्टर की तरफ इशारा करती है, जो प्लूटोनियम और अन्य वेपंस मैटेरियल बनाने में सक्षम है. जबकि अन्य चार एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह रिएक्टर या न्यूक्लियर वेपंस बनाने की जगह हो सकती है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रोजेक्ट अभी भी शुरुआती फेज में है. इसलिए ये पुष्टि करना मुश्किल है.
इजरायल: परमाणु प्रोग्राम
हालांकि, इजरायल ने परमाणु हथियारों के होने की न तो पुष्टि की है और न ही इनकार किया है, 1950 के दशक तक इजरायल ने इजरायल परमाणु ऊर्जा आयोग (Israel Atomic Energy Commission) की स्थापना की थी. इसके बाद से ही इजरायल ने नेगेव में यूरेनियम की खोज शुरू कर दी थी. 1956 के स्वेज क्राइसिस के बाद फ्रांस के साथ एक खुफिया अलायंस के जरिए से उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को गति मिली, जिसमें पेरिस ने फ्रांसीसी मंसूबे, टेक्निशियन और एक्सपर्टीज का इस्तेमाल करके डिमोना हेवी-वाटर रिएक्टर के निर्माण में मदद की. लेकिन, इस साइट को आधिकारिक तौर पर एक टेक्सटाइल प्लांट कहा जाता है.
वहीं, रिएक्टर इतना काबिल था कि वह हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम तैयार कर सकता था. 1960 के दशक के बीच तक इजरायल के पास अपना पहला न्यूक्लियर वेपन बनाने लायक मैटेरियल मौजूद था. जबकि, डिमोना का हेवी वॉटर रिएक्टर 1960 के दशक से काम कर रहा है. यह अपने वक्त के ज्यादातर रिएक्टरों से कहीं ज्यादा चला है, इसलिए अब इसे बदलने या बड़े लेवल पर मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है. ऐसा माना जा रहा है.
इजरायल मीडिल-ईस्ट का इकलौता देश
इजरायल मीडिल-ईस्ट का इकलौता ऐसा देश है जिसके बारे में माना जाता है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. हालांकि मिस्र, इराक, सीरिया, लीबिया और ईरान जैसे देशों ने विभिन्न समय पर न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाए हैं. इनमें से कुछ देशों ने ज्यादा आक्रामक तरीके से ये प्रोग्राम शुरू किया था, लेकिन कोई भी देश परमाणु बम विकसित करने में सफल नहीं हो पाया है.