1974 में लाइनमैन पति की मौत, पेंशन और ग्रैच्युटी फाइलों में फंसी, 51 साल बाद हाईकोर्ट ने दिया न्याय

चंडीगढ़: सुनकर भले ही अजीब लगे लेकिन एक महिला ने अपने हक के लिए पांच दशक तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने लाइनमैन की विधवा बुजुर्ग महिला को पेंशन देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि वह दो महीने के अंदर सभी कानूनी बकाया रकम वापस दिलाए। 80 साल की विधवा पढ़ी-लिखी नहीं है। हाईकोर्ट का यह आदेश सुर्खियों में आ गया है। हाई कोर्ट ने राज्य के बिजली डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को आदेश दिया कि वह खुद उनके क्लेम को वेरिफाई करें और बकाया रकम जारी करें। कोर्ट ने बुधवार को जारी अपने डिटेल्ड ऑर्डर में कहा कि एक कि 80 साल की विधवा को राहत देना समझदारी का मामला नहीं बल्कि संवैधानिक तौर पर जरूरी है।

विभाग से नहीं सुलझाया केस
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्मी देवी के पति महा सिंह लाइनमैन थे। वह लाइनमैन से सब-स्टेशन ऑफिसर बने थे। 1974 में काम करते हुए उनकी मौत हो गई। उन्हें 6,026 रुपये की एक्स-ग्रेशिया रकम मिली, जबकि फैमिली पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव सैलरी और प्रोविडेंट फंड जैसे दूसरे फायदे विवादित रहे। बार-बार रिप्रेजेंटेशन और 2005 में एक रिट फाइल करने और RTI एप्लीकेशन के बावजूद विभाग के अधिकारी मामले को सुलझाने में नाकाम रहे। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी दूसरी तरफ डाल दी और गायब रिकॉर्ड का हवाला दे दिया।

बिजली विभाग पर फूटा गुस्सा
यह मामला इसके बाद कोर्ट में पहुंचा। सालों तक लंबी लड़ाई के बा पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि जब भी कोर्ट सबसे कमजाेर लोगों को फेल करते हैं, तो संविधान का वादा कमजोर हो जाता है, लेकिन हर बार जब वे हाशिए पर पड़े लोगों का बचाव करते हैं, तो संविधान की बदलने वाली भावना अपने असली रूप में चमकती है। कोर्ट ने कहा कि पिटीशनर (बुजुर्ग महिला) बिना क्लैरिटी या राहत के लगभग पांच दशकों तक दर-दर भटकने को मजबूर थी। हाईकोर्ट ने बिजली विभाग की आलोचना की और कहा कि उन्होंने बुज़ुर्ग विधवा को उसके कई बार आने और बातचीत करने के बावजूद पूरी तरह से अनजान रखा।