ब्लैक होल का सबसे भयानक धमाका लाइव कैमरे में कैद, 280 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर मची तबाही

नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने 280 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक गैलेक्सी में ब्लैक होल का महाविस्फोट देखा है. यह कोई आम धमाका नहीं था. आईसी 3599 नाम की इस गैलेक्सी में पिछले 35 साल में यह तीसरी बार हुआ है. इससे पहले 1990 और 2010 में भी ऐसा ही भयानक ब्लास्ट हुआ था.

लेकिन तब वैज्ञानिक इसे लाइव कैमरे में रिकॉर्ड नहीं कर पाए थे. यह पहला मौका है जब रिसर्चर्स ने इस तबाही के मंजर को रियल टाइम में देखा है. इस महाविस्फोट के कारण ब्लैक होल की रोशनी अपनी सामान्य स्थिति से 50 गुना ज्यादा बढ़ गई. इस धमाके के बाद से वैज्ञानिक लगातार ब्लैक होल के गहरे रहस्य को समझने में जुटे हैं.

आखिर किस गैलेक्सी में हुआ ये खौफनाक ब्लैक होल महाविस्फोट?
यह भयानक धमाका आईसी 3599 नाम की गैलेक्सी के ठीक बीच में मौजूद ब्लैक होल में हुआ है. यह गैलेक्सी हमारी धरती से करीब 280 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है. वैज्ञानिकों ने नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी की मदद से इसका पता लगाया है.

साल 2013 से ही साइंटिस्ट इस खतरनाक ब्लैक होल पर नजर रख रहे थे. अक्टूबर 2025 में अचानक से इसके रिसर्च डेटा में एक बड़ा बदलाव देखा गया. उस वक्त यह ब्लैक होल अपनी सबसे शांत स्थिति में था. अचानक से यह 50 गुना ज्यादा चमकदार हो गया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया.

नदर्न केंटुकी यूनिवर्सिटी के डी. ग्रूपे की टीम ने इसकी सबसे पहले पहचान की. इस टीम ने स्विफ्ट और एक्सएमएम-न्यूटन जैसे पावरफुल टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया. इसके अलावा जमीन पर मौजूद कई ऑब्जर्वेटरी ने भी इस बड़े धमाके का अहम डेटा जमा किया.

क्या किसी तारे के टूटने से ब्लैक होल में यह भयानक ब्लास्ट हुआ?
वैज्ञानिक काफी लंबे समय से अंतरिक्ष में होने वाले इस तरह के धमाकों की असल वजह तलाश रहे हैं. जब भी कोई ब्लैक होल इस तरह का भारी विस्फोट करता है, तो उसके पीछे कई अलग थ्योरी होती हैं. कुछ साइंटिस्ट मानते हैं कि जब ब्लैक होल किसी विशाल तारे को निगलता है, तो ऐसा भयंकर ब्लास्ट होता है. लेकिन इस मामले में रिसर्चर्स ने एक बिल्कुल अलग ही वजह बताई है.

उनका मानना है कि ब्लैक होल की एक्रिशन डिस्क में भयंकर रेडिएशन का दबाव बना था. इस दबाव के कारण वहां मौजूद गैस पूरी तरह से अस्थिर हो गई. जब गैस की मात्रा एक खास सीमा से ज्यादा बढ़ गई, तो वहां भयानक विस्फोट हो गया. विस्फोट के बाद ब्लैक होल की डिस्क पूरी तरह खाली हो जाती है. फिर यह धीरे-धीरे ठंडी होती है और दोबारा खतरनाक गैस से भरने लगती है.

यह विशाल विस्फोट किसी फिक्स टाइमलाइन पर नहीं हुआ है. पहले और दूसरे धमाके के बीच करीब 19.5 साल का लंबा अंतर था. वहीं दूसरे और तीसरे ब्लास्ट में करीब 15.7 साल का समय लगा.
साइंटिस्ट ने अपने लेटेस्ट रिसर्च पेपर में बताया है कि यह कोई रेगुलर घटना नहीं है. इस बड़े धमाके के दौरान वैज्ञानिकों को एक बेहद अजीब पैटर्न देखने को मिला.

एक्स-रे की चमक हर 7.4 घंटे में लगातार ऊपर और नीचे हो रही थी. विज्ञान की भाषा में इस अजीब पैटर्न को क्वासी-पीरियोडिक ऑसिलेशन कहा जाता है. इस रहस्यमय ब्लैक होल का वजन करीब 2 मिलियन सोलर मास के बराबर आंका गया है.
लिक और जिंगलोंग जैसे पावरफुल टेलीस्कोप ने भी इस भारी धमाके की एक्सक्लूसिव तस्वीरें कैद की हैं. इन तस्वीरों में भारी मात्रा में आयोनाइज्ड आयरन देखने को मिला है. जो यह बताता है कि तबाही बहुत बड़े इलाके में फैली है.

क्या भविष्य में फिर से देखने को मिलेगा ऐसा विनाशकारी और भयानक नजारा?

इस चौंकाने वाली स्टडी को 10 जुलाई को ArXiv नाम के एक सर्वर पर पब्लिश किया गया है. वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि ब्लैक होल की यह तबाही आगे भी ऐसे ही जारी रह सकती है. जैसे ही एक्रिशन डिस्क दोबारा गैस से भरेगी, वहां एक और बड़ा ब्लास्ट हो सकता है. साइंटिस्ट अभी कुछ दूसरी थ्योरी को भी पूरी तरह से खारिज नहीं कर रहे हैं.

यह भी मुमकिन है कि कोई तारा बार-बार ब्लैक होल के एकदम पास से गुजर रहा हो. हर बार वह तारा अपनी कुछ अहम ऊर्जा हमेशा के लिए खो देता है. लेकिन मौजूदा डेटा के हिसाब से अंदरूनी अस्थिरता ही इस महाविस्फोट की सबसे बड़ी वजह है. डी. ग्रूपे की टीम ने कहा, ‘यह अनोखी घटना हमें ब्लैक होल के अंदर की भौतिकी समझने का शानदार मौका देती है.’