नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा दुनिया में ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है. नरेंद्र मोदी सरकार संसद के चल रहे विंटर सेशन में परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 (Atomic Energy Bill, 2025) पेश करने जा रही है, जिसे SHANTI (Sustainable Harnessing of Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) नाम दिया गया है. यह 1962 के परमाणु ऊर्जा कानून के बाद सबसे बड़ा सुधार होगा.
63 साल पुराने राज्य एकाधिकार को तोड़ते हुए प्राइवेट कंपनियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में हिस्सेदारी मिलेगी. सरकारी एजेंसियां सुरक्षा और संचालन संभालेंगी, लेकिन प्राइवेट प्लेयर्स पूंजी, जमीन और तकनीक लाएंगे. यह कदम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लिए जरूरी है.
आजादी के बाद से भारत का परमाणु क्षेत्र एक किले की तरह बंद था. परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और सरकारी परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) ही सब संभालते थे. 1962 के परमाणु ऊर्जा कानून में साफ लिखा था कि प्राइवेट कंपनियां या राज्य सरकारें परमाणु संयंत्र नहीं चला सकतीं. वजह बताई गई राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा चिंताएं. आजादी के बाद से सिर्फ सरकारी प्लांट बने, कुल 8 गीगावाट (GW) क्षमता, जो देश की कुल बिजली का सिर्फ 3% है.
लेकिन अब बदलाव आ रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2025 के बजट में ही संकेत दिया था. पीएम मोदी ने 27 नवंबर को हैदराबाद में स्पेस स्टार्टअप स्काइरूट के उद्घाटन पर कहा, “हम परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खोल रहे हैं. यह छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और नई इनोवेशन के लिए ताकत देगा.” यह घोषणा संसद विंटर सेशन (1-19 दिसंबर) से ठीक पहले आई, जहां विधेयक लिस्टेड है।
SHANTI विधेयक क्या बदलेगा? प्राइवेट को क्या मिलेगा?
यह विधेयक पुराने कानूनों को एकीकृत करेगा – Atomic Energy Act, 1962 और Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 में संशोधन कर प्राइवेट एंट्री की राह खुलेगी. कंपनी की परिभाषा बदलकर Companies Act, 2013 के तहत रजिस्टर्ड किसी भी फर्म को लाइसेंस मिल सकेगा.
प्राइवेट की भूमिका: कंपनियां (जैसे रिलायंस, टाटा पावर, अडानी) जमीन, पानी, पूंजी और तकनीक देंगी. वे बनी बिजली के मालिक होंगी – यानी बेचकर मुनाफा कमा सकेंगी.
सरकार का कंट्रोल: NPCIL या DAE ही रिएक्टर डिजाइन, निर्माण, संचालन और संवेदनशील सामग्री (यूरेनियम) संभालेगी. सुरक्षा IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के मानकों पर होगी.
SMR पर फोकस: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) – फैक्टरी में बनने वाले सस्ते, सुरक्षित और तेज प्लांट. बड़े प्लांट में दशकों लगते हैं, SMR में महीनों में लग जाएंगे.
कैबिनेट ने 12 दिसंबर को SHANTI को मंजूरी दी. एक नया न्यूक्लियर ट्रिब्यूनल विवाद सुलझाएगा. स्पेशलाइज्ड सेफ्टी अथॉरिटी IAEA से जुड़ेगी. विदेशी कंपनियां (अमेरिका, फ्रांस) भी आकर्षित होंगी.
क्यों जरूरी? 15-19 लाख करोड़ की पूंजी, जलवायु लक्ष्य
भारत ने 2047 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का वादा किया है. परमाणु ऊर्जा साफ और विश्वसनीय है – कोयले या सोलर से ज्यादा स्थिर है. वर्तमान 8 GW से 100 GW (12 गुना बढ़ोतरी) का लक्ष्य है. इसके लिए 15-19 लाख करोड़ रुपये (214 अरब डॉलर) लगेंगे. NPCIL जैसे सरकारी संगठन अकेले नहीं संभाल सकते.
सोलर-विंड में PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) ने सफलता दिखाई – 2024 तक 100 GW रिन्यूएबल जोड़ा. परमाणु में भी यही मॉडल अपनाया जाएगा. पीएम मोदी ने कहा कि प्राइवेट स्पेस सेक्टर की तरह, युवाओं की इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा. मार्च 2024 में NPCIL ने SMR के लिए प्राइवेट टेंडर जारी किया, लेकिन देरी हुई. अब विधेयक से रफ्तार आएगी.