नई दिल्ली. इंसाफ की धीमी रफ्तार ने मौत के बाद भी एक बेटी को चैन की नींद सोने नहीं दिया. चार साल बीत गए, श्रद्धा वालकर के कटे हुए अंग आज भी अदालती फाइलों और मालखाने के चक्कर काट रहे हैं. शरीर के वो 35 टुकड़े जो कभी किसी जल्लाद की हैवानियत का शिकार हुए थे, आज केस प्रॉपर्टी बनकर बंद कमरों में पड़े हैं. एक बदनसीब बाप अपनी ही बेटी की अस्थियों को मुखाग्नि देने की आस लिए सिस्टम से लड़ते-लड़ते खुद दुनिया से रुखसत हो गया, लेकिन श्रद्धा की रूह आज भी अपने अंतिम संस्कार के पवित्र हक के लिए अदालतों के चक्कर काट रही है.
आफताब की परीक्षा के बहाने टली सुनवाई
इस मामले में ताजा विवाद साकेत जिला अदालत की सुनवाई के दौरान सामने आया. दरअसल, अदालत ने केस के स्पीडी ट्रायल के लिए 20 जुलाई से 27 जुलाई तक रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई तय की थी, लेकिन ऐन वक्त पर आरोपी आफताब पूनावाला ने कोर्ट के सामने एक नया बहाना रख दिया. आफताब ने अदालत को बताया कि 20 जुलाई को तिहाड़ जेल स्थित इग्नू परीक्षा केंद्र पर उसकी एमए (समाजशास्त्र) की परीक्षा है. इसके बाद अदालत ने 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई को टाल दिया और अगली तारीख 21 जुलाई तय कर दी. पीड़ित पक्ष की वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा की तारीखें बहुत पहले से तय होती हैं तो आरोपी ने यह बात कोर्ट को पहले क्यों नहीं बताई?
टूट गई पिता की सांसें
वकील सीमा कुशवाहा ने बताया कि इस वीभत्स हत्याकांड को करीब 4 साल हो चुके हैं और पिछले 3 साल से इसका ट्रायल चल रहा है. इस लंबी देरी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि श्रद्धा के अवशेष अभी भी ‘केस प्रॉपर्टी’ के रूप में अदालत और पुलिस के पास जमा हैं. कानूनी प्रक्रियाओं के कारण परिवार अपनी बेटी का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया है. बेटी को खोने के गहरे सदमे और इंसाफ के लिए दर-दर भटकने की वजह से श्रद्धा के पिता भी अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे. इसी गहरे मानसिक आघात के कारण फरवरी 2025 में हार्ट अटैक से उनका भी निधन हो चुका है.
हाईकोर्ट जाएगा पीड़ित पक्ष
पीड़ित पक्ष का साफ तौर पर आरोप है कि आरोपी आफताब पूनावाला और उसका लीगल पक्ष किसी न किसी बहाने से हर बार सुनवाई को टालने की कोशिश कर रहा है ताकि मामले को लंबा खींचा जा सके. बार-बार तारीख आगे बढ़ने और लोअर कोर्ट में हो रही देरी से परेशान होकर अब पीड़ित पक्ष ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा के मुताबिक इस मामले के तेजी से निपटारे और जल्द सुनवाई के लिए अब वे दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने की पूरी तैयारी में हैं ताकि श्रद्धा की आत्मा को न्याय और उसके अवशेषों को सम्मान मिल सके.