कुछ तो बड़ा होने… जापान ने फिर से शुरू किया दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्लांट

Japans largest nuclear power plant: जापान एक बार फिर परमाणु ऊर्जा की ओर लौटने की तैयारी में है. देश दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट काशीवाजाकी-कारीवा को दोबारा शुरू करने जा रहा है. यह संयंत्र जापान की राजधानी टोक्यो से करीब 220 किलोमीटर दूर निगाटा प्रांत में स्थित है. साल 2011 में आई भीषण सुनामी और भूकंप के बाद जापान ने अपने सभी 54 परमाणु रिएक्टर बंद कर दिए थे. इसकी वजह फुकुशिमा दाइची न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुआ गंभीर हादसा था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था.

11 मार्च 2011 को आई सुनामी से फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा था. रिएक्टर के क्षतिग्रस्त होने से रेडिएशन फैलने लगा, जिससे जमीन, हवा और समुद्र का पानी भी प्रभावित हुआ, हालात इतने खराब थे कि प्लांट के 20 किलोमीटर के दायरे को खाली कराना पड़ा. करीब 27 हजार परिवारों, यानी लगभग डेढ़ लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े. इस हादसे को 1986 के चेर्नोबेल हादसे के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु हादसा माना गया.

फुकुशिमा हादसे के बाद जापान को अपनी बिजली जरूरतों के लिए तेल, गैस और कोयले जैसे ईंधनों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ा. इससे बिजली महंगी हुई और आयात का बोझ भी बढ़ा. इसी कारण जापान ने धीरे-धीरे परमाणु संयंत्रों को फिर से शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए. जांच के बाद 33 रिएक्टरों को तकनीकी रूप से दोबारा चालू करने के योग्य माना गया, जिनमें से अब तक 14 रिएक्टर फिर से शुरू किए जा चुके हैं.

काशीवाजाकी-कारीवा पावर प्लांट खास इसलिए है क्योंकि इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 4,696 मेगावॉट है. इसी क्षमता के कारण इसे दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट माना जाता है. यह संयंत्र टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी द्वारा संचालित किया जाता है, जो फुकुशिमा प्लांट की भी जिम्मेदार थी. इसी वजह से इसे लेकर लोगों के मन में अब भी डर और चिंता बनी हुई है

जब ये हादसा हो गया उसके बाद फुकुशिमा प्लांट में लांखों टन रेडियोधर्मी पानी, परमाणु का कचरा और ईंधन की छड़े अभी भी मौजूद हैं. जिन्हें हटाने में कई साल लग सकते हैं. ऐसे में काशीवाजाकी-कारीवा प्लांट को फिर से शुरू करने का फैसला आसान नहीं है. हालांकि जापान सरकार का मानना है कि कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ परमाणु ऊर्जा देश की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है.