राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़ा हमला करके वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को पकड़कर देश से बाहर ले गई है. दशकों से चले आ रहे विवादों, आर्थिक हितों और रणनीतिक दांव-पेंच के बीच अमेरिका की इस कार्रवाई ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सवाल ये है कि इस कार्रवाई के पीछे ट्रंप का क्या मकसद है, आइए बताते हैं इस हमले के पीछे की 5 सबसे बड़ी वजहें-
नार्को टेररिज्म और ड्रग्स
ट्रम्प अमेरिका में बढ़ती कोकीन जैसी ड्रग्स के लिए वेनेजुएला को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. उन्होंने मादुरो और उनके सहयोगियों पर Cartel de los Soles नाम से कोकीन तस्करी का नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया है. वह इसे विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित कर चुके हैं. उनका सीधा आरोप है कि मादुरो और उनका कार्टेल अवैध रूप से नशीली दवाओं की सप्लाई में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जिनसे अमेरिकी नागरिक मर रहे हैं. 2020 में अमेरिका ने मादुरो पर नार्को टेररिज़्म के आरोप भी तय किए थे. हालांकि मादुरो हमेशा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं.
अमेरिका में अवैध घुसपैठ
ट्रंप बार-बार मादुरो पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने जानबूझकर अपनी जेलें और पागलखाने खाली कर दिए हैं और कैदियों को अमेरिका की ओर पलायन करने के लिए मजबूर किया है. वेनेजुएला में आर्थिक संकट की वजह से 2013 के बाद से 80 लाख से अधिक लोग देश छोड़ चुके हैं. इनमें से लाखों लोगों के अमेरिका पहुंचने का अनुमान है. ट्रंप का मानना है कि मादुरो को हटाने से ही यह मास माइग्रेशन रुक पाएगा.
सबसे बड़े तेल भंडार पर नजर
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है. फिलहाल वह अपना ज्यादातर तेल चीन को बेचता है. ट्रंप प्रशासन यह सहन नहीं कर पा रहा कि उसके पास के किसी देश में इतना बड़ा संसाधन हो और वह अमेरिका के प्रतिद्वंद्वियों का सहयोग कर रहा हो. जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला में सत्ता बदलने से अमेरिकी कंपनियों को वहां बड़ा निवेश करने और तेल बाजार पर अपना कंट्रोल जमाने का मौका मिलेगा.
विचारधारा की लड़ाई
डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को एक क्रूर समाजवादी तानाशाह कहते रहे हैं. वह अक्सर रैलियों में कहते हैं कि अगर मादुरो जैसे नेताओं को नहीं रोका गया तो अमेरिका की हालत भी वेनेजुएला जैसी हो जाएगी. अमेरिका और उसके सहयोगी देश मानते हैं कि मादुरो ने चुनाव में धांधली करके सत्ता हथियाई है. अमेरिका ने मादुरो को वैध राष्ट्रपति मानने से ही इनकार कर दिया था और विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी थी. ट्रंप मादुरो को भगोड़ा और अवैध नेता बताते रहे हैं जिन्हें सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है.
चीन-रूस का दखल
ट्रंप ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में 19वीं सदी के ‘मुनरो डॉक्ट्रिन’ को फिर से जीवित किया है. आसान भाषा में बताएं तो इसका मतलब है कि पश्चिमी गोलार्ध यानी अमेरिका के आसपास के इलाके में में किसी भी बाहरी ताकत खासकर चीन और रूस की दखलंदाजी को वह बर्दाश्त नहीं करेगा. मादुरो ने चीन और रूस के साथ बड़े ऊर्जा और खनन समझौते किए थे, जिससे अमेरिका को लग रहा था कि चीन उसके पास सैन्य ठिकाने बना सकता है.
महीनों से चल रही वेनेजुएला की घेराबंदी
ट्रंप ने ड्रग कार्टेल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का ऐलान करते हुए वेनेजुएला खासकर मादुरो पर महीनों पहले से शिकंजा कसना शुरू कर दिया था. उन्होंने मादुरो पर नार्को टेररिज्म के आरोप लगाते हुए अगस्त से ही वेनेजुएला के तट पर विमान वाहक पोतों और युद्धपोतों की भारी तैनाती कर दी थी. सितंबर से वह समुद्र में दर्जनों नावों को निशाना बना चुका है. हाल ही में वेनेजुएला में एक लोडिंग डॉक को नष्ट करने का भी दावा किया था. अब अमेरिकी सैनिक वेनेजुएला में हमला करके मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर ले गए हैं.