अब नई दिशा में बहेगी सिंधु , इन राज्यों की बुझाएगी प्यास; डैम परियोजनाओं का भी प्लान

Indus Waters Treaty: दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ते जल संकट के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की है कि पहले पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को अगले डेढ़ साल में दिल्ली और पड़ोसी राज्यों की ओर मोड़ दिया जाएगा. जानकारी के अनुसार, सरकार ने ये कदम सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद उठाया गया है. बता दें, सिंधु जल संधि को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद स्थगित कर दिया गया था. शुक्रवार को दिल्ली के जल निकासी मास्टर प्लान के अनावरण समारोह में बोलते हुए खट्टर ने इस स्थिति को आपदा में भी अवसर बताया. उन्होंने बताया कि आतंकी हमले के बाद भारत ने दशकों पुरानी उस संधि को रद्द कर दिया, जिसके तहत पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब का बड़ी मात्रा में पानी पाकिस्तान में प्रवाहित होता था.

दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की प्यास बुझाएगी सिंधु

इस पानी का मार्ग परिवर्तन दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में पेयजल की गंभीर कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है. हालांकि, इसके महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हैं. हालांकि इस संधि को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, फिर भी भारत द्वारा अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करने और पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने के कदम को एक शक्तिशाली कूटनीतिक और रणनीतिक उपकरण के रूप में देखा जा रहा है.

इस योजना को साकार करने के लिए भारत कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी ला रहा है. इनमें किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण और चिनाब नदी को रावी-व्यास-सतलज प्रणाली से जोड़ने वाली 113 किलोमीटर लंबी नहर के लिए अध्ययन शामिल है. इस महत्वाकांक्षी अंतर-बेसिन जल अंतरण परियोजना का उद्देश्य जरूरतमंद राज्यों को अतिरिक्त जल प्रवाह प्रदान करना है, जिससे बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता के बावजूद क्षेत्रीय जल लचीलापन सुनिश्चित हो सके. इन परियोजनाओं का सफल कार्यान्वयन भारत के जल संसाधनों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसका क्षेत्र के भू-राजनीतिक परिदृश्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा.