India-US Trade Deal Delay Reason : भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील नहीं हो सकी. अमेरिका ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए डील अटक गई तो वहीं भारत ने अमेरिका के बेतुके बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत की ओर से साल 2025 में 8 बार ट्रेड डील पर बातचीत हुई. ट्रंप अपने मनमाने अंदाज और अपनी शर्तों पर ये ट्रेड डील साइन करना चाहते हैं, लेकिन भारत ने भी साफ कर दिया है कि उसके लिए देश हित सर्वोपरी है. ट्रंप जो पीएम मोदी को दोस्त-दोस्त बोलकर भारत के पीठ पर छुरा खोंप रहे हैं, उसी पर पाबंदिया, उसी पर 50 फीसदी टैरिफ लगा रहे हैं. ये तो हुई वो वजहें जिसे सारी दुनिया देख रही है, लेकिन ट्रंप की नाराजगी, उनकी खीज की असली वजह तो कुछ और है.
क्यों भारत पर बिलबिलाए रहते हैं ट्रंप ?
भारत के खिलाफ ट्रंप की खीज की असली वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का वो फैसला है, जिसने अमेरिको को बड़ा झटका और उसकी बादशाहत को चुनौती दे दी है. दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने चार साल में पहली बार अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश को घटा दिया है. चार साल में RBI का ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश 200 अरब डॉलर से नीचे गिरकर अक्टूबर 2025 के अंत तक 190 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पहले यह 240 अरब डॉलर के करीब था, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश को घटाकर सोने में निवेश को बढ़ा दिया है. कहीं गले ही हड्डी न बन जाए सस्ता रूसी तेल, 500% टैरिफ का पहाड़ फोड़ने की फिराक में ट्रंप…अगर ऐसा हुआ तो भारत की मुश्किल समझिए
क्यों घटाया अमेरिकी बॉन्ड में निवेश
भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार करीब 687 अरब डॉलर का है. भारत ने अमेरिकी बॉन्ड से निवेश घटाकर 190 अरब डॉलर कर दिया है. अब सवाल ये कि आखिर रिजर्व बैंक ने ऐसा क्यों किया ? दरअसल जिस तरह से दुनियाभर में युद्ध और अनिश्चितता का माहौल है भारत अपना सारा पैसा एक जगह नहीं रखना चाहता है. अमेरिका पर बढ़ते कर्ज के चलते रिजर्व बैंक ने अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटाया है.
सोने पर रिजर्व बैंक का फैसला, अमेरिकी की बढ़ी टेंशन
अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटाने के बाद रिजर्व बैंक उसे सोने में लगा रहा है. यूएस बॉन्ड से पैसा निकालकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सोना खरीद रहा है. भारत का कुल गोल्ड रिजर्व 880 टन है, जो पहले 867 टन के करीब था. सोने में रिजर्व बैंक का लगातार बढ़ता निवेश अमेरिका की टेंशन बढ़ रहा है. भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 9 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी पर पहुंच गई है. यूं ही समुद्री डकैत नहीं बन रहे ट्रंप! तेल के बाद अब ‘पानी की जंग’ में उतरा अमेरिका,ट्रंप का प्लान क्यों है दुनिया के लिए खतरनाक?
सोने में क्यों बढ़ रही रिजर्व बैंक की दिलचस्पी
रिजर्व बैंक सोने में निवेश बढ़ा रहा है, क्योंकि सोना सेफ हेवल माना जाता है. इसकी वैल्यू कभी घटती नहीं बल्कि समय के साथ बढ़ती है. किसी भी वॉर या क्राइसिस की स्थिति में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है. दुनियाभर के सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी बढ़ाकर अपने खजाने को मजबूत कर रहे हैं.
सिर्फ भारत ही नहीं चीन, ब्राजील और सऊदी अरब भी साथ
सिर्फ भारत ही नहीं, रिजर्व बैंक के इस फैसले के नक्शेकदम पर चीन, ब्राजील, भारत, हांगकांग और सऊदी अरब के केंद्रीय बैंकों ने भी साल-दर-साल अमेरिकी बॉन्ड में अपने निवेश को कम किया है. इन देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मैनेज करने का तरीका बदल दिया है.
क्यों दुनिया पर भड़के हुए हैं ट्रंप ?
अमेरिकी बॉन्ड में घटना निवेश, सोने की ओर भारत समेत दुनिया के तमाम देशों की दिलचस्पी अमेरिकी की टेंशन बढ़ा दी है. डॉलर की बादशाहत को लगे झटके ने ट्रंप को नाराज कर दिया है. अमेरिकी डॉलर के घटते दबदबे और फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर की घटती हिस्सेदारी ट्रंप को खफा कर रही है. दुनिया के कई देश अपने फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर का हिस्सा कम कर रहे हैं. अमेरिकी डॉलर की जगह सोना ले रहा है. ग्लोबल फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी गिरकर 40% पर पहुंच ग है, जो 20 साल के निचले स्तर पर है. बीते 10 सालों में इसमें 18% की गिरावट आई है. वहीं डॉलर की हिस्सेदारी में 12% बढ़कर 28% पर पहुंच गई. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से सोने पर भरोसा बढ़ता चला गया. इस युद्ध के दौरान अमेरिका और पश्चिमी देशों ने विदेशों में जमा रूसी एसेट्स को फ्रीज कर दिया था. जिसके बाद से दुनियाभर के देश डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर सोने पर भरोसा बढ़ा रहे हैं. इसी बात से खफा ट्रंप दुनियाभर पर अलग-अलग तरीकों से नाराजगी जता रहे हैं