BJP Bihar Bengal Formula: जैसे ही बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, बंगाल भाजपा ने भी खूब लड्डू बांटे. पीएम ने बिहार जीत के कनेक्शन को बंगाल तक जोड़ दिया. ऐसे में यह समझना दिलचस्प है कि बिहार जीतने के बाद भाजपा बंगाल में कौन सा प्रयोग करने जा रही है. आपको जानकर शायद ताज्जुब हो कि रणनीति के तहत 3 साल से ही एक टॉप नेता बंगाल में अपना तंबू गाड़े हुए हैं.
गंगाजी बिहार से बहते हुए ही बंगाल तक पहुंचती हैं. बिहार ने बंगाल में भाजपा की विजय का रास्ता भी बना दिया है… बिहार की प्रचंड जीत के बाद बधाई भाषण में बोले गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ये शब्द बड़ा मैसेज दे रहे हैं. बिहार जीतते ही भाजपा की चुनावी मशीन बंगाल फतह के लिए एक्टिव कर दी गई है. इस बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के विजयी अभियान को रोकने के लिए भाजपा नई रणनीति पर काम कर रही है. साथ ही बिहार वाला ok tested वाला प्रयोग बंगाल में भी दोहराया जाएगा. सबसे पहले भाजपा ने तय किया है कि वह अपने सबसे प्रभावशाली नेताओं को बंगाल में तैनात करेगी.
यह तो साफ है कि अब तक ममता का मनोबल तोड़ने में फेल रही भाजपा अगर बंगाल जीतती है तो यह पूरी पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली बात होगी. आपको याद होगा गृह मंत्री अमित शाह जब भाजपा अध्यक्ष थे, तब उन्होंने कहा था कि भाजपा का उत्थान तब होगा जब वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अपना मुख्यमंत्री चुनेगी. इससे साफ है कि भाजपा का मिशन बंगाल इतना अहम क्यों है.
बंगाल चुनाव को लीड कौन करेगा?
अगले साल यानी 2026 में मार्च या अप्रैल के महीने में बंगाल में चुनाव हो सकते हैं. भाजपा ने बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ने का फैसला किया है. प्रचार अभियान सामूहिक नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों पर निर्भर करेगा.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हिसाब से बताया गया है कि भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. बंगाल के 91,000 बूथों में से भाजपा ने करीब 70,000 बूथों पर बूथ समितियां गठित कर ली हैं. उधर चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में जुटा हुआ है.
उम्मीद की जा रही है कि बिहार की तरह, SIR की प्रक्रिया बंगाल की मतदाता सूची को भी शुद्ध कर देगी. बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं के नाम साफ हो सकते हैं. एक भाजपा नेता ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियां बंगाल में साइंटिफिक धांधली के जरिए चुनाव जीतती थीं जिसमें सबसे बड़ा खेल यह होता था कि मृत मतदाताओं के नाम सूची में शामिल कर अपने कार्यकर्ताओं से वोट डलवाए जाते थे. हालांकि एसआईआर के बाद इसमें गुंजाइश नहीं बचेगी.
इस ‘त्रिमूर्ति’ को बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा अब अपने बूथस्तरीय अभियान को तेज करने जा रही है. पार्टी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है.
बंगाल में भाजपा की अब तक की तैयारी
1. राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल पिछले तीन साल से बंगाल में डेरा डाले हुए हैं. वह पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं. वह लगातार ग्राउंड पर बने हुए हैं.
2. एक बड़ा कदम यह उठाया गया है कि राज्य भाजपा नेताओं के बीच मतभेद को सुलझा लिया गया है और राज्य इकाई के भीतर अनुशासन बनाए रखने की पूरी कोशिश हो रही है.
3. राज्य के नेताओं से अनावश्यक बयानबाजी से बचने और तृणमूल कांग्रेस के ‘जाल’ में न फंसने को कहा गया है, जो बंगाल के लोगों को साधने के लिए अपना नरैटिव तैयार करने की कोशिश कर सकती है.
4. एकजुटता का संदेश देने के लिए भाजपा बड़े प्लान पर काम कर रही है जिसमें केवल वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाएगा.
बिहार वाला फार्मूला
हां, आप समझ ही गए होंगे. महिलाओं पर फोकस रहेगा. एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने एनडीटीवी को बताया कि इस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा का होगा. उन्होंने कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद महिलाओं पर रोजाना हो रहे अत्याचार, आरजी कांड, दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को सामने लाया जाएगा.
भाजपा नेताओं का कहना है कि उद्योगों की कमी के कारण रोजगार भी एक बड़ा मुद्दा होगा. तृणमूल सरकार की ओर से महिलाओं को दी जाने वाली लक्ष्मी भंडार योजना पर सवाल उठ रहे हैं. सूत्र बता रहे हैं कि आगे बंगाल के वोटरों को भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं को दी जाने वाली ज्यादा वित्तीय सहा
दी जाने वाली ज्यादा वित्तीय सहायता का उदाहरण बताया जाएगा. नेताओं ने कहा कि बिहार में जिस तरह महिलाओं के रोजगार के लिए 1.5 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये देने का फैसला लिया गया, उसे बंगाल में प्रचारित किया जाएगा.
भाजपा की तरकश में रखे तीर चुनावी समर में वंशवाद की राजनीति और भ्रष्टाचार पर टारगेट करेंगे. साथ ही कथित मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर तृणमूल कांग्रेस को घेरने की तैयारी है. भाजपा नेता बता रहे हैं कि राज्य में 120 विधानसभा सीटें हैं जिन पर भाजपा ने कभी न कभी जीत हासिल की है. पार्टी 160 सीटों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन सीटों और बाकी 40-50 सीटों पर अपनी पूरी ताकत लगाने की कोशिश कर रही है. राज्य में विधानसभा की 294 सीटें हैं. टवार! महेश बाबू का हजारों का ज़ुर्माना एक झटके में साफ