US Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसलों से ग्लोबल इकोनॉमी को हिला दिया है. एक तरफ ईरान पर हमले के साथ पूरे मिडिल ईस्ट को अशांत कर दिया है. मिडिल ईस्ट, जो ग्लोबल ऑयल एंड गैस सप्लाई का मुख्य सेंटर हैं जंग की वजह से वो सप्लाई चेन टूट गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने, तेल और गैस रिफाइनरियों पर अमेरिकी हमले की वजह से तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. गैस की किल्लत का संकट मंडराने लगा है, इन सबके बीच ट्रंप इसी हफ्ते टैरिफ का नया बम फोड़ने वाले हैं.
इसी हफ्ते फूटेगा टैरिफ का नया बम
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि इस हफ्ते से टैरिफ की दरें जो फिलहाल 10 फीसदी है, बढ़कर 15 फीसदी तक जा सकती है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि टैरिफ बढ़ाने का फैसला जल्द लागू हो सकता है. उन्होंने संकेत किए हैं कि इसी हफ्ते से पूरी दुनिया के लिए लागू किया जा सकता है. उन्होंने ये भी दावा किया है कि 5 महीने के अंदर टैरिफ की दरें वहीं हो सकती हैं, जो कोर्ट के ऑर्डर के पहले थी. घायल ईरान का घातक प्रहार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद! भारत के पास कितने दिन का तेल बचा ? प्लान B भी समझिए
बता दें कि अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप के हाई रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने नए टैरिफ का ऐलान किया. पहले उसे 10 फीसदी और बाद में उसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया. हालांकि इसकी अधिकतम समयसीमा 150 दिनों की ही है. यानी ट्रंप प्रशासन इन 150 दिनों में पुराने टैरिफ दरों को दोबारा लागू करने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाश रहा है. बेसेंट के दावे से साफ है कि ट्रंप टैरिफ पर इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं. वो सेक्शन 301 और सेक्शन 232 जैसे कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर इसे दोबारा से लागू करने की तैयारी में है.
ट्रेड वॉर के बीच तेल और गैस की सप्लाई पर असर
इस तरफ ट्रंप टैरिफ के जरिए ट्रेड वॉर कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में वॉर के जरिए ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल और गैस आपूर्ति में दिक्कत आ रही हैं, हालांकि अमेरिकी सेक्रेटरी बेसेंट के मुताबिक खाड़ी देशों के बाहर करोड़ों बैरल तेल पहले से सप्लाई में मौजूद है . उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिकी की ओर से ऑयल सप्लाई को लेकर बड़े ऐलान किए जा सकते हैं.