Tamilnadu Elections 2026: अगले कुछ महीनों में दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु में चुनाव होने हैं. अभी न चुनावी बिगुल बजा, ना ही राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ने के लिए औपचारिक सियासी गठबंधन का ऐलान किया, लेकिन सत्ता की मलाई खाने के लिए बेकरार कांग्रेस ने जो जल्दबाजी दिखाई, उसे लेकर डीएमके (DMK) के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के ग्रामीण विकास मंत्री पेरियासामी ने कांग्रेस को टका सा जवाब दिया है.
कांग्रेस को दो टूक जवाब
डीएमके नेता पेरियासामी ने कांग्रेस को तो टूक जवाब देते हुए, तमिलनाडु में गठबंधन सरकार यानी सत्ता के बंटवारे की रत्तीभर संभावना से भी इनकार किया है. पेरियासामी ने कहा, ‘कांग्रेस हो या कोई और पार्टी मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, सहयोगी दलों के साथ सत्ता साझा करने के सख्त खिलाफ हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की नई मांग पर पूछे गए सवालों के जवाब में पेरियासामी ने कहा, ‘गठबंधन के साथी का सत्ता में बंटवारा मांगना किसी भी पार्टी का अधिकार है, लेकिन DMK ने कभी गठबंधन व्यवस्था का समर्थन नहीं किया है’.
गठबंधन सरकार से तौबा!
पेरियासामी ने अपनी बात बढ़ाते हुए कहा, ‘कभी भी गठबंधन सरकार नहीं रही है. तमिलनाडु में हमेशा DMK ने अकेले राज किया है. डीएमके के इस रुख में कोई शक नहीं है. ये तय है कि न तो कोई गठबंधन सरकार होगी. मुख्यमंत्री स्टालिन खुद इस रुख पर अब भी कायम हैं’.
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हाल ही में सत्ता में हिस्सेदारी की अपनी मांग फिर से उठाई है. कांग्रेस पार्टी के सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि सत्ता में हिस्सेदारी पर बहस करने का समय आ गया है. वहीं CLP नेता और कन्याकुमारी से विधायक एस राजेशकुमार ने भी गठबंधन सरकार के पक्ष में बात करते हुए सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल को बढ़ावा दिया है. आपको बताते चलें तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडणकर ने पूछा था कि क्या कोई राजनीतिक पार्टी ये कहेगी कि वे सत्ता नहीं चाहते. अगर कोई ऐसा कहे तो उसे खुद को राजनीतिक पार्टी नहीं बल्कि एनजीओ कहना चाहिए.
तमिलनाडु का सियासी समीकरण
तमिलनाडु में 38 जिले हैं. इस राज्य की सीमाएं आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल से जुड़ती हैं. यहां लोकसभा की 39 और विधानसभा की 234 सीटे हैं. यहां 12 स्थानीय राजनीतिक दल रजिस्टर्ड हैं. चुनाव आयोग ने तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के आंकड़े जारी कर दिए हैं. तमिलनाडु में एसआईआर के दौरान 97 लाख वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं.
डीएमके 1967 से अपने स्टैंड पर कायम है. डीएमके ने कभी सत्ता का बंटवारा स्वीकार नहीं किया. 2006 में डीएमके ने बहुमत से कम सीटें मिलने के बावजूद कांग्रेस और अन्य के समर्थन से पूरे पांच साल सरकार चलाई, लेकिन उसने किसी को एक भी मंत्री पद नहीं दिया. कांग्रेस नेताओं ने तब भी सत्ता में भागीदारी मांगी थी, लेकिन डीएमके टस से मस नहीं हुई.