India Coldest Village: इन दिनों उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. रात तो छोड़िए, दिन में भी लोगों की कंपकंपी नहीं छूट रही है. ऐसे में आप भारत के सबसे ठंडे गांव में जनजीवन की कल्पना कीजिए. जहां पर गीले कपड़े तुरंत जम जाते हैं और सर्दियों में तापमान माइनस 60 तक गिर जाता है. दिल से सोचकर बताइए, क्या आप कभी इस गांव में रहना चाहेंगे.
भारत का सबसे ठंडा गांव
भारत का सबसे ठंडा आबादी वाला गांव द्रास है. यह गांव लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित है. इस गांव की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 3,300 मीटर है. इस गांव को अक्सर ‘लद्दाख का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है. यहां की सर्दियां इतनी कठोर होती हैं कि मजबूत से मजबूत इंसान की भी हिम्मत यहां पर आकर पस्त हो जाती है.
फ्रिज से भी नीचे गिर जाता है टेंपरेचर
द्रास के तापमान की बात करें तो वहां पर हर साल सर्दियों में टेंपरेचर फ्रिज से भी नीचे गिर जाता है. वहां पर सर्दियों में औसत तापमान आमतौर पर -20°C से -25°C तक गिर जाता है. एक बार वहां पर तापमान -60°C तक भी जा चुका है. ऐसे तापमान को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इंसान वहां कितने कठोर हालात में रहते हैं.
कैसे काटते हैं सर्दियों के 6 महीने?
इस जानलेवा ठंड से निपटने के लिए द्रास के लिए अनोखे तरीके ईजाद कर रखे हैं. कठोर सर्दियों में जीवन जीने के लिए वे अपने घरों को लकड़ी की मोटी दीवारों से तैयार करते हैं. साथ ही लकड़ी के चूल्हों और ऊनी कपड़ों का लगातार इस्तेमाल करते हैं. घर की ऊंचाई ज्यादा नहीं रखी जाती और खिड़कियां पूरी कसकर बंद रखी जाती हैं. जिससे ठंड अंदर न जा सके.
जीवन जंग जैसा है लोगों का जीवन
सर्दियों में द्रास में ठंड इतनी ज्यादा होती है कि पानी की पाइपें भी जम जाती हैं. साथ ही बर्फबारी की वजह से गांव को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाले रास्ते भी बंद हो जाते हैं. ऐसे में उनके लिए रोज़मर्रा के काम करना और जीवन गुजारना बेहद कठिन हो जाता है. फिर भी वहां लोग कभी हिम्मत नहीं हारते.
उत्सव की तरह करते हैं गर्मियों का स्वागत
द्रास के लोगों के लिए गर्मियों का आगमन एक उत्सव की तरह होता है. अप्रैल-मई में बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है. साथ ही रास्ते फिर से खुलने से गांव में हलचल फिर लौट आती है. गांव में शादी ब्याह का सीजन शुरू हो जाता है. पर्यटक गांव में आने लगते हैं, जिससे लोगों को रोजगार मिलता है.
द्रास में कुल कितने लोग रहते हैं?
इतना ठंडा होने के बावजूद द्रास में आबादी कम नहीं है. वहां पर करीब 22 हजार लोग रहते हैं. वे गर्मियों के छोटे से सीजन में खेती करते हैं. सर्दियों में उगने वाले फल उगाते हैं और याक पालकर उसके दूध-मांस से पेट भरते हैं. अब वहां के लोग धीरे-धीरे पर्यटन और गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब की ओर भी जाने लगे हैं. जिससे गांव में खुशहाली बढ़ी है.